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महाशिवरात्रि की पूजा के दौरान भगवान शिव पर न चढ़ाएं ये चीजें

रिलिजन डेस्क. महाशिवरात्रि की खास विशेष पूजा में कुछ खास चीजों से भगवान शिव की पूजा की जाती है। वहीं कुछ ऐसी चीजों का भी ध्यान रखना चाहिए जो भगवान शिव को नहीं चढ़ाई जाती है। भूल से भी उन चीजों का उपयोग पूजा में किया तो दोष लगता है। भगवान शिव को भांग- धतूरे का चढ़ावा बहुत पसंद है, पर कुछ ऐसी सामग्रियां भी हैं जिनका उपयोग महाशिवरात्रि पर शिव आराधना के दौरान बिल्कुल नहीं करना चाहिए। शिवपुराण के अनुसार शिव भक्तों को कभी भी भगवान शिव को इन छह वस्तुओं का प्रसाद नहीं चढ़ाना चाहिए।

महाशिवरात्रि की पूजा में इन 5 चीजों का इस्तेमाल न करें
  केतकी के फूल
पौराणिक कथा के अनुसार केतकी फूल ने ब्रह्मा जी के झूठ में साथ दि या था, जिससे नाराज होकर भोलनाथ ने केतकी के फूल को श्राप दिया और कहा कि शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा। इसी श्राप के बाद से शि व को केतकी के फूल चढ़ाना अशुभ माना गया है।


हल्दी ना चढ़ाएं
शिवजी के अतिरिक्त लगभग सभी देवी- देवताओं को पूजन में हल्दी गंध और औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है और हल्दी स्त्रियोयोचित वस्तु है। स्त्रियोयोचित यानी स्त्रियों से संबंधित। इसी वजह से शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है।

कुमकुम या सिंदूर
सिंदूर, विवाहित स्त्रियों का गहना माना गया है। स्त्रियां अपने पति की लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए  अपने मांग में सिंदूर लगाती हैं और भगवान को भी अर्पित करती हैं, लेकिन शिव तो विनाशक हैं, यही वजह है कि सिंदूर से भगवान शिव की सेवा करना ठीक नहीं माना जाता है।

शंख से जल
दैत्य शंखचूड़ के अत्याचारों से देवता परेशान थे। भगवान शंकर ने त्रिशूल से उसका वध किया था, जिसके बाद उसका शरीर भस्म हो गया,उस भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई थी। शिवजी ने शंखचूड़ का वध किया इसलिए कभी भी शंख से शिवजी को जल अर्पित नहीं किया जाता है।

तुलसी की पत्ती
यूं तो तुलसी की पत्तियां पूजा में काम आती है, लेकिन भगवान शिव की पूजा के लिए नहीं करना चाहिए। भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जालंधर का वध किया था। इसलिए उन्होंने स्वयं भगवान शिव को अपने अलौकिक और दैवीय गुणों वाले पत्तों से वंचित कर दिया।

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