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सोयाबीन बोने वाले कृषकों के लिए उपयोगी सलाह

 जिले में सोयाबीन की खेती करने वाले क्षेत्रो में मानसून का आगमन होने पर कृषि विभाग द्वारा किसानों को लगभग 4 इंच वर्षा होने के बाद ही सोयावीन की बुवाई करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग द्वारा किसानों से बौवनी करते समय आवश्यक बातों का विशेष ध्यान रखने के लिए भी कहा गया है। 
     किसानों को सलाह दी गई कि मानसून की अनिश्चितता के कारण उत्पादन में स्थिरता के लिए संभव होने पर सोयाबीन की बौवनी रिज-फरौ (कूड मेंड़ पद्धति) से ही करें जिससे सुखे/अतिवर्षा के दोरान उत्पादन प्रभावित न हो। सोयावीन के अनुशंसित पोषक तत्वों (नत्रजन, स्फुर, पोटाश, सल्फर) की पूर्ति के लिए उर्वरकों का प्रयोग संतुलित मात्रा में बौवनी के समय करें। कृषि विभाग द्वारा सलाह दी गई है कि सोयावीन की बौवनी हेतु 45 से.मी. कतारों की दूरी पर तथा न्युनतम 70 प्रतिशत अंकुरण के आधार पर उपयुक्त बीज दर (55 से 75 कि.ग्रा/हैं.) का उपयोग करें। बौवनी के समय बीज उपचार अवश्य करें। किसानों को अनुशंसित फफूंदनाशक थायरम+कार्बोक्सीन (3 ग्रा/कि.ग्रा.बीज) अथवा थायरम + कार्बेन्डाजिम (2:1) 3 ग्रा./किग्रा बीज) अथवा जैविक फफूंदनाशक ट्रायकोडर्मा 10 ग्रा./कि.ग्रा. बीज उपचारित करने की सलाह दी गई है

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