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निर्माण में गोलमाल : अफसरों का रूकेगा वेतन, निर्माण में देरी पर थोकबंद शोकाज


भोपाल। प्रदेश में स्कूलों के निर्माण कामों को लेकर अफसरों पर गाज गिरने की स्थिति बन गई है। जिलों में स्कूल निर्माण की धीमी रफ्तार और पर्याप्त बजट खर्च न करने के कारण थोकबंद नोटिस जारी किए गए हैं। इसमें अनेक जिलों के अफसरों का वेतन रोकने के लिए कहा गया है, जबकि अन्य जगहों पर शोकाज देकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके बावजूद स्थिति न सुधरने पर संबंधित अफसरों की गोपनीय चरित्रावली में उनका निर्माण व बजट संबधित परफार्मेंस जोड़ा जाएगा।
दरअसल, पिछले कुछ सालों में केंद्र से राशि मिलने और उसके उपयोग को लेकर बेहद सख्ती की गई है। केंद्र ने उपयोगिता प्रमाण-पत्र न होने के कारण अनेक बार किश्त रोक दी। इस कारण सरकार ने स्कूलों के निर्माण को लेकर इस बार शुरूआत से सख्ती बरती है। इसके तहत ३८ से ज्यादा जिलों में निर्माण काम को लेकर नाराजगी जाहिर की गई है। इसमें दस प्रतिशत से भी कम निर्माण काम और बजट खर्च न करने वाले जिलों में जनवरी २०२० का वेतन रोकने के आदेश दे दिए गए हैं। इसमें कलेक्टरों को मानीटरिंग करने के लिए कहा गया है, ताकि मैदानी तौर पर भी कसावट आ सके।

इन जिलों पर वेतन रूकने का खतरा-
उमरिया, श्योपुर, पन्ना, शाजापुर, रायसेन, डिंडौरी, रतलाम, विदिशा, अनूपपुर, बैतूल, नीमच, झाबुआ, भिंड, देवास और जबलपुर जिले में दस प्रतिशत से कम बजट खर्च व काम को लेकर वेतन रोकने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इन जिलों में अफसरों की जवाबदेही तय करके वेतन रोका जाएगा। वहीं आगर-मालवा, अलीराजपुर, अनूपपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, दमोह, दतिया, धार, डिंडौरी, गुना, हरदा, झाबुआ, कटनी, खरगौन, मंदसौर, मुरैना, नीमच, पन्ना, रायसेन, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, शाजापुर, श्योपुर, सीधी, टीकमगढ़ व उमरिया में कार्ययोजना ही पेश नहीं की गई। इसलिए इन जिलों के जिला परियोजना समन्वयक और सहायक यंत्रियों को चेतावनी दी गई है। इनसे पूरी रिपोर्ट तलब की गई है।
छह साल पुराने काम भी अधूरे-
खास बात ये कि स्कूलों के निर्माण के मामले में छह से सात साल पुराने काम भी अधूरे हैं। इन निर्माण कामों को अब टाइम-लाइन तय करके पूरा करने के लिए कहा गया है। करीब ३२ जिलों में पुराने निर्माण कामों की स्थिति बेहद खराब पाई है। इसी कारण अफसरों की परफार्मेस ऑडिट में निर्माण व बजट को जोडऩा तय किया गया है। इसके तहत सभी जिला परियोजना समन्वयकों की जवाबदेही तय की जा रही है।

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