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उपचुनाव से पहले कांग्रेस ने दिया नया नारा, 'बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए, फिर से कमलनाथ चाहिए'

 By: Mahendra Singh soalnki

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Published: 17 Aug 2020, 07:39 AM IST

कांग्रेस ने 'बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए, फिर से कमलनाथ चाहिए' का नारा दिया है। वहीं, कांग्रेस के इस नारे से प्रदेश की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

भोपाल/ मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी अपनी जीत की मुहिम तैयार कर चुके हैं। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते 15 अगस्त को प्रदेश की जनता को लुभाने के लिए बड़े बड़े वादे किये हैं, वहीं कांग्रेस भी सत्ता वापसी के लिए कई तरह के कार्ड खेलने की तैयारी में है। इसी के चलते कांग्रेस ने एक नया नारा दिया है। कांग्रेस ने 'बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए, फिर से कमलनाथ चाहिए' का नारा दिया है। वहीं, कांग्रेस के इस नारे से प्रदेश की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

 

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कांग्रेस के नारे पर बीजेपी का पलटवार

मध्य प्रदेश भाजपा ने कांग्रेस द्वारा लगाए गए इस नारे पर करारा जवाब देते हुए कहा है कि, उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने के लिए कांग्रेस पार्टी को चेहरे नहीं मिल रहे। जिस कांग्रेस पार्टी का वजूद खत्म हो रहा हो उसका नारा कितना असरदार होगा, ये अंदाजा जनता खुद ही लगा सकती है। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी (BJP) में शामिल हुए सिंधिया समर्थक कैबिनेट मिनिस्टर गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि, कांग्रेस की स्थिति बहुत खराब है। उपचुनाव के लिए कांग्रेस के पास अभी उम्मीदवार भी नहीं हैं और ऐसे में कांग्रेस का नारा कांग्रेस पर ही भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है।

 

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कांग्रेस बांट रही स्लोगन लिखे मास्क

27 विधानसभा सीटों वाले इलाकों में कांग्रेस ने अब इस नारे को भुनाना शुरू कर दिया है। यही नहीं कांग्रेस पार्टी ने इस नारे के स्लोगन वाले मास्क उपचुनाव वाले क्षेत्रों में बांटना शुरु कर दिये हैं। इन मास्क पर यही स्लोगन लिखा है, जिसमें कहा गया है, बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए, फिर से कमलनाथ चाहिए। दरअसल, प्रदेश के 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में 25 सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस के विधायकों ने दल बदल कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। ऐसे में अब कांग्रेस इन दल बदलने वाले विधायकों पर भाजपा के हाथों बिकने का आरोप लगा रही है। इन्हीं आरोपों के जरिये कांग्रेस उप-चुनाव के रण में उतरने की रणनीति बना रही है।

 

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दल बदल की परंपरा पुरानी

ये बात तो सभी जानते हैं कि, देश में होने वाले कोई भी चुनाव से पहले दल बदलने की परंपरा पुरानी है। लेकिन 2018 के चुनाव में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस खेमे से 25 विधायकों के दल बदलने का मामला देश में पहली बार देखने को मिला। विधायकों के दल बदलने का झटका कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोकर गवाना पड़ा। अब कांग्रेस पार्टी ने इसी मुद्दे के सहारे दल बदलने वाले चेहरों की घेराबंदी करने करने की रणनीति बना रही है, जिसे लेकर अब प्रदेश की सियासत गर्मा गई है।

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