भोपाल नगरी प्रशासन विभाग के मंत्री भूपेंद्र सिंह के पास मध्य प्रदेश स्मार्ट सिटी कंपनी की शिकायत पहुंची है। मंत्री को बताया गया है कि स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिकारी संविदा पर रखे गए कर्मचारियों को तंग कर रही है। बिना कारण नोटिस देती है वेतन रोक लेती है और फिर नौकरी से निकाल देती है। मंत्री ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिकारियों से तुरंत दूरभाष पर बात की और दोबारा शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि स्मार्ट सिटी कंपनी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
दरअसल मध्य प्रदेश संविदा अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर के नेतृत्व में 5 सदस्ययी प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार नगरी प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह से मुलाकात की है। अध्यक्ष रमेश राठौर की तरफ से बताया गया है कि प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि मध्यप्रदेश स्मार्ट सिटी कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मचारी, अधिकारी, इंजीनियर के साथ भेदभाव किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के 7 स्मार्ट सिटी शहर भोपाल, सागर, सतना, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर में कार्यरत संविदा इंजीनियर और कर्मचारी अधिकारियों को जब चाहे नौकरी से हटा रहे हैं, बिना कारण, शोकाज पत्र देकर प्रताड़ित किया जा रहा है। संविदा कर्मचारियों को हटाकर प्रतिनियुक्ति से भर्ती कर कर लेते हैं और भी अप्रत्यक्ष रूप से संविदा पर रखे गए इंजीनियर, कर्मचारी अधिकारियों को परेशान करते हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर को इस मामले में कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।
नियमित करने की मांग फिर उठी
प्रदेश के अधिकतर विभागों में सवा लाख संविदा अधिकारी कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इनकी सेवाओं को अधिकतम 20 साल और न्यूनतम 5 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। ये संविदा अधिकारी कर्मचारी पिछले 15 सालों से नियमित करने की मांग कर रहे हैं। पूर्व में धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। सरकार इनके लिए पूर्व में सरकारी नौकरी में प्रतिनिधित्व देने संबंधी नियम तय किए थे लेकिन संविदा कर्मचारियों का कहना है कि उस पर भी ठीक से अमल नहीं किया जा रहा है। स्थिति यह है कि 15000 कर्मचारी अब तक बिना नियमितीकरण के सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनमें वे कर्मचारी भी हैं जिनकी सेवाओं के दौरान मौत हो गई थी अब तक इन कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को अनुकंपा तक नहीं मिली है। मध्य प्रदेश संविदा अधिकारी कर्मचारी महासंघ इन विषयों पर भी पिछले कई सालों से सरकार का ध्यान दिलाते आ रहा है। अब नियमितीकरण की मांग को लेकर दोबारा लड़ाई शुरू की जाएगी। इस बात की पुष्टि महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर ने की है।

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