भोपाल राजधानी भोपाल में स्थित जेपी अस्पताल प्रदेश का दूसरा सबसे अच्छा अस्पताल बन गया है। सेवाओं की गुणवत्ता के लिए दिए जाने वाले कायाकल्प पुरस्कार में अस्पताल दूसरे नंबर पर रहा है। पहला पुरस्कार जबलपुर के जिला अस्पताल को और तीसरा विदिशा जिला अस्पताल को मिला है। पहले, दूसरे और तीसरे नंबर वाले अस्पतालों को क्रमश: 50 लाख, 20 लाख और 10 हजार रुपये पुरस्कार दिया गया है। पुरस्कारों की घोषणा सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कार्यालय में की।
2015 से शुरू हुए कायाकल्प अवार्ड में पहली बार जेपी अस्पताल शीर्ष पांच की सूची में आया है। इसके पहले हर बार अस्पताल 70 फीसद से ज्यादा अंक लाकर सिर्फ सांत्वना पुरस्कार पाता था। इस बार अस्पताल को पहले नंबर पर लाने के लिए कलेक्टर अविनाश लवानिया और अस्पताल अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बहुत प्रयास किया था। एनएचएम के अपर संचालक डॉ. पंकज शुक्ला ने बताया कि पहली बार 35 जिला अस्पताल कायाकल्प के मूल्यांकन में 70 फीसद से ज्यादा अंक लेकर आए हैं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. संजय गोयल, एनएचएम की एमडी छवि भारद्वाज और स्वास्थ्य विभाग के सचिव बसंत कुर्रे मौजूद थे।
आधे से भी कम अंक से चूका जेपी अस्पताल
जेपी अस्पताल को पहले नंबर पर आए जबलपुर जिला अस्पताल से 0.5 फीसद से भी कम अंक मिले हैं। 'मेरा अस्पताल" एप के जरिए मरीजों से लिए गए फीडबैक और अस्पताल के बाहर की गई गतिविधियों में जेपी अस्पताल मामूली अंतर से पिछड़ गया। इसमें सफाई, स्वच्छता, संक्रमण रोकथाम, सहयोगी सेवाएं जैसे बार्डब्वाय आदि की सेवाओं का मूल्यांकन किया जाता है।
किस अस्पताल को कौन-सा पुरस्कार मिला
निरंतर उत्कृष्टता पुरस्कार- जिला चिकित्सालय सिवनी को 15 लाख रुपये।
तेजी से सुधार- जिला अस्पताल नीमच को पांच लाख का पुरस्कार।
सांत्वना पुरस्कार- 70 फीसद से ज्यादा अंक लाने पर 30 जिला अस्पतालों को।
सिविल अस्पताल/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी)- पहला पुरस्कार इछावर (सीहोर) को 15 लाख स्र्पये।
द्वितीय पुरस्कार- सीएचसी रामनगर (सतना) व पाटन (जबलपुर)।
निरंतर उत्कृष्टता पुरस्कार- सिविल अस्पताल एल्गिन जबलपुर, 10 लाख रुपये।
सांत्वना पुरस्कार- 80 सीएचसी व सिविल अस्पताल

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