बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में लगी आग पर ग्रामीण और वन विभाग आमने-सामने हैं। वन मंत्री विजय शाह का कहना है कि महुआ बीनने वाले लोग जंगल में आग लगा देते हैं। उन्हें समझाइश दी गई है। आगे भी दी जाएगी। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि चार दिन तक लगी आग काे बुझाने में प्रबंधन नाकाम रहा है, इसलिए वे ग्रामीणों पर दोष मढ़ रहे हैं।
शुक्रवार शाम वनमंत्री बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का जायजा लेने पहुंचे। गौरतलब है कि बांधवगढ़ की रेंज में पिछले चार दिनों से लगातार आग धधक रही है। उन्होंने माना कि जंगल में लगी आग को बुझाने में दो दिन लग गए। वनमंत्री ने कहा- शनिवार सुबह निरीक्षण के दौरान 8 जगह लोग महुआ बीनते हुए मिले। उन्हें पेड़ के नीचे आग नहीं लगाने की समझाइश दी गई। वनमंत्री ने क्षेत्र में नुकसान की स्थिति का जायजा लिया।
लापरवाही छिपा रहा रिजर्व प्रबंधन
इधर, टाइगर रिजर्व के आसपास गांव में रहने वाले ग्रामीणों का कहना है, टाइगर रिजर्व प्रबंधन समय रहते आग पर काबू पाने में नाकाम रहा है। अपनी लापरवाही छिपाने के लिए अब महुआ बीनने वालों पर दोषारोपण की तैयारी रहा है। टाइगर रिजर्व के आसपास ग्रामीण कई वर्षों से रह रहे हैं। कोई भी ग्रामीण जंगल को नुकसान नहीं पहुंचाता। ग्रामीणों ने बताया, होली के समय जंगल में उत्पाती तत्वों द्वारा आग लगाई जाती है। इसके लिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन को अलर्ट रहना था, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी उत्सव मनाने में जुटे रहे।
टाइगर रिजर्व के 10 गांव के विस्थापन की तैयारी
वनमंत्री विजय शाह ने बताया, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 गांव हैं। इनमें गढ़पुरी, बगदरी, बमेरा, कसेरू, बड़वारी, बगैया, कुसमा, कुठीहा, रंजीताल व सेजवारी शामिल हैं। इन गांवों के रहवासियों को समझाएंगे कि आबादी के बीच रहेंगे, तो जंगल से ज्यादा बेहतर जिंदगी होगी। ग्रामीणों के विस्थापन पर उन्हें मुआवजा भी दिया जाएगा।
जंगल में आग बुझाने बनेगी रणनीति
भविष्य मे ऐसी घटनाएं नहीं हों, इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। इसके तहत एक माह के लिए चौकीदार की व्यवस्था, नाइट विजन के लिए ड्रोन की व्यवस्था, एंबुलेंस, ब्लोअर, फायर फाइटर की व्यवस्था का प्रस्ताव है। इसी तरह विदेशों में फायर फाइटर, हवाई जहाज का उपयोग जंगलों की आग बुझाने के लिए किया जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
जंगल बढ़ाने से ज्यादा शिफ्टिंग पर जोर
वनमंत्री ने कहा, नेशनल पार्क में बाघों की संख्या अधिक होने से उनके बीच आपसी संघर्ष के मामले मिल रहे हैं। इसके लिए नेशनल पार्क के बाघों को अलग शिफ्ट किया जाएगा। वहीं, बाघों को शिफ्ट करने की रणनीति को वन्यप्राणी प्रेमी गलत बता रहे हैं। जानकारों का कहना है कि प्रबंधन को जंगल के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए, न कि बाघों की शिफ्टिंग पर।

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