ए ग्रेड के मुरैना रेलवे स्टेशन से मालगोदाम छीनने के बाद अब टिकट कलेक्टरों के तबादले की तैयारी है। व्यवस्थाओं में लगातार कटौती का असर राजस्व पर आएगा और अगले दौर में रेल सुविधाओं में कटौती होने लगेगी। अभी रेलवे को गुड्स की लोडिंग से 5 करोड़ व यात्री टिकटों से 30 लाख रुपए महीने की आय हो रही है।
मुरैना रेलवे स्टेशन पर चीफ टिकट इंसपेक्टर से लेकर टीटीई व टिकट कलेक्टर के 8 पद स्वीकृत हैं। इनमें से चार पदों पर पदस्थ सीटीआई, टीटीई व टीसी को मुरैना से अन्य स्टेशनों पर तबादला करने का प्रस्ताव उत्तर-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय ने तैयार कर लिया है। आने वाले समय में मुरैना रेलवे का टीसी डिपो खत्म हो जाएगा। ऐसा होने से वीआईपी को इमरजेंसी में सीट उपलब्ध कराने की समस्या पैदा होगी। रेलवे के जानकारों का कहना है कि टीसी के 8 पदों पर कर्मचारियों की पदस्थापना की जगह यहां पदस्थ स्टाफ हटाने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इस कार्रवाई से जाहिर है कि रेलवे बोर्ड मुरैना से रेल यात्री सुविधाओं में कटौती का मन बना चुका है।
माल गोदाम को मुरैना से रायरू शिफ्ट करने को लेकर सॉल्वेंट तेल व कारोबारियों की चिंता बढ़ी है। व्यापारियों का कहना है कि मालगोदाम की सुविधा खत्म होने से उनको खली की रैक लोड करने के लिए अपना माल ट्रकों से 35 किमी दूर रायरू भेजना पड़ेगा। इससे उन पर परिवहन भाड़ा का बोझ बढ़ेगा।ऐसा होने से खली के रेट बढ़ जाएंगे और उसका असर मुर्गी दाना के रेट पर पड़ेगा।
मुरैना में हर महीने खली की 7 रैक बंगाल, बांग्लादेश के लिए लोड हो रही हैं। इससे रेलवे को सॉल्वेंट कारोबारियों से हर महीने 5 करोड़ की आय हो रही है। आय अच्छी होने के कारण मुरैना स्टेशन को ए ग्रेड मिला है। माल गोदाम मुरैना से रायरू शिफ्ट होने पर रैक लोड होने की आय ग्वालियर स्टेशन के खाते में जुड़ जाएगी और मुरैना की आय उतनी कम हो जाएगा। इससे रेलवे मुरैना में रेल व यात्री सुविधाओं का कम करेगी।अभी रेलवे को मुरैना में 44 यात्री गाड़ियों से महज 30 लाख रुपए महीने का राजस्व मिल पा रहा है। क्योंकि 22 यात्री गाड़ियों का संचालन कोविड के कारण 10 महीने से बंद है। 66 ट्रेनों के संचालन की स्थिति में रेलवे को यात्री टिकटों से अधिकतम 2 करोड़ रुपए की आय होती रही है।
मालगोदाम भी रायरू में शिफ्ट
तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए मुरैना के 100 साल पुराने मालगोदाम को मुरैना से रायरू शिफ्ट कर दिया गया है। वर्तमान मालगोदाम को लेकर जो पत्राचार चल रहा है उस पर मुरैना की जगह रायरू मालगोदाम लिखकर आने लगा है। तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए रेल विकास निगम नए व पुराने माल गोदाम को नवंबर बाद डिसमेंटल करेगा। दोनों मालगोदाम टूटने की दशा में मुरैना के उद्यमियों को डीओसी लोड करने के लिए अपना माल रायरू भेजना पड़ेगा। मुरैना से माल गोदाम छिनने के बाद 5 करोड़ रुपए महीने के राजस्व मे कमी आएगी इससे रेल यात्री सुविधाओं में कटौती होगी। थर्ड रेल लाइन बिछाने के फेर में रेल विकास निगम ने मुरैना में नए व पुराने मालगोदाम को तोड़ने का प्लान तैयार कर लिया है।
सांक नदी पर तीसरा रेल ब्रिज बनने के साथ ही मुरैना के दोनों प्लेटफार्म को डिस्मेंटल करने का काम शुरू हो जाएगा। शहर में पुराना मालगोदाम रेल स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में है और नया मालगोदाम प्लेटफार्म शिकारपुर फाटक के पास। दोनों मालगोदाम एक साथ तोड़े जाएंगे।कुछ आवास भी डिसमेंटल किए जा सकते हैं। मुरैना के माल गोदाम को रेलवे ने 31 किमी दूर रायरू में शिफ्ट करने की कार्ययोजना बनाई है।

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