शिवपुरी अतिवृष्टि के कारण शिवपुरी शहर का स्टेट कालीन मनियर तालाब पूरी तरह लबालब भर गया है। इस पुराने तालाब के फूटने के डर से प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका के अधिकारी मौके पर पहुंचे। तालाब के ठीक नीचे 100 से ज्यादा परिवार रहते हैं, इन सभी पर तालाब फूटने का सीधा खतरा मंडरा रहा है।
यदि तालाब फूटता है तो शिवपुरी शहर के अधिकांश हिस्से में बाढ़ आ सकती है। इसलिए शिवपुरी एसडीएम और तहसीलदार ने तालाब के नीचे रहने वाले परिवारों को घर खाली करने के लिए दो घंटे का अल्टीमेटम दिया। लेकिन कोई भी परिवार घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।
एसडीएम अरविंद बाजपेयी, तहसीलदार भूपेंद्र कुशवाह, एसडीओपी अजय भार्गव, टीआई बादाम सिंह, नगर पालिका एई सचिन चौहान सहित राजस्व, नपा अमला व पुलिस गुरुवार की दोपहर मनियर गोदाम के पीछे पहुंचे। लबालब भरे मनियर तालाब की स्थिति का जायजा लेने के बाद तहसीलदार कुशवाह ने 2:50 बजे माइक से बस्ती खाली करने का अनाउंसमेंट कर दिया।
तालाब फूटने की आशंका जताकर दो घंटे में बस्ती खाली करने की बात कही। साथ ही संबंधित परिवारों के लिए मानस भवन में पहुंचने को कहा। लेकिन देर शाम तक बस्ती में किसी भी परिवार ने घर खाली नहीं किया।
पानी निकासी वाला गेट बंद, शिव परिवार स्थापित कर मंदिर बनाया
स्टेटकाल में किसानों को मनियर तालाब से नहर से फसल सिंचाई के लिए पानी मिलता था। लेकिन तालाब में आबादी बढ़ती गई और तालाब का गेट बंद कर दिया। इतनी अधिक बारिश नहीं होने से तालाब खाली ही रहता था।
कब्जाधारियों ने गेट खोलने वाली जगह पर शिव परिवार स्थापित कर मंदिर ही बना दिया। बड़ा मंदिर बनाने बगल में नीव खोदकर एक-एक फीट निर्माण भी कर दिया था। गेट से निकली नहर पर भी कब्जा कर मकान तान दिए। अब पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए तालाब फूटने की आशंका बढ़ गई है।
मुरम उत्खनन वाली जगह 20-22 मकान बनाए, वह अब पानी में डूब रहे
तालाब के नीचे वाले हिस्से में आबादी से पहले माफिया ने मुरम उत्खनन कर ली और वहां खाई बन गई। बाद में लोगाें ने कब्जे करके मकान बना लिए। ऊपर से नहर ही गायब कर देने से पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। वर्तमान में 20-22 मकान जलमग्न हैं और यहां रहने वाले परिवार दूसरी जगह किराए से रह रहे हैं।
प्रशासन ने पानी रोक रही पाटौर तोड़ी
तालाब के नीचे मकानों में भरे पानी को लेकर शिकायत के बाद प्रशासनिक अधिकारी देखने पहुंचे। पानी निकासी वाली जगह पर पूरन पाल ने पाटौर बना दी थी, उसे प्रशासन ने तुड़वा दिया है। लेकिन नीचे की तरफ नहर पर कब्जा करके कॉलोनाइजर ने गायब कर दिया है। प्लॉट बेचकर नहर पर ही मकान बनवा दिए हैं। इसलिए पानी निकासी की समस्या अभी भी बनी है।
वजह : कब्जे के वक्त प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, अब मुश्किल हो रही
मनियर तालाब के ठीक नीचे नहर सहित अन्य सरकारी जमीन पर लोगों ने धीरे-धीरे कब्जे कर लिए। सरकारी जमीन की अनुबंध पत्रों पर खूब खरीद-फराेख्त चलती रही। वर्तमान में तमाम मकान बन चुके हैं और सैंकड़ों लोग रह रहे हैं। अब तालाब भरने से उसके फूटने का डर सता रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। यदि पहले ही ध्यान दिया होता तो अवैध बस्ती नहीं बसती।
कोटा गांव के पास नहर ओवरफ्लो होने से झांसी सड़क बही
- कोटा गांव के पास नहर ओवरफ्लो होने से झांसी रोड बह गई है। झांसी व करैरा जाने के लिए अब लोगों को पड़ौरा चौराहे से कोटा-झांसी फोरलेन हाइवे जाना पड़ रहा है।
- पचावली पुल क्षतिग्रस्त होने व गुरुवार को फिर से जल स्तर बढ़ने से मार्ग बंद है। बदरवास होकर घुरवार पुल से सड़, ऐजवारा के जरिए खतौरा पहुंचना पड़ रहा है।
- पिछोर क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। ज्यादातर पुलों की दोनों तरफ की एप्रोच सड़क पानी में बह गईं हैं।
- बैराड़ तहसील में पार्वती की बाढ़ के कारण पोहरी-मोहना रोड बंद हो गया है। हर्रई, सिलपरी गांव की सड़कें बहने से संपर्क टूट गया है।
- धौलागढ़ फाटक से गोपालपुर होकर पोहरी-मोहना रोड को जोड़ने वाले मार्ग का रायपुरा स्थित पुल के एप्रोच सैलाब में बह गए हैं।
- नरवर से मगरौनी रोड सिंध के सैलाब में बह गई है, जिससे मगरौनी का नरवर से संपर्क कटा है।
- कूनो नदी में बाढ़ के कारण शिवपुरी का श्योपुर से संपर्क कट गया है। बैराड़ से विजयपुर जाने वाला मार्ग भी सैलाब में बह गया है।

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