कोविड-19 के दौरान मई महीने में सिद्धि विनायक अस्पताल में भर्ती एक कोविड पीड़ित की मौत के बाद उसकी लाश को घर पर फेंक जाने के मामले में शहर के अधिवक्ता अभय जैन और स्वप्निल शुक्ल ने सिद्धि विनायक अस्पताल पर मानव अधिकारों के हनन सहित चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य सेवाएं, कलेक्टर शिवपुरी, सीएमएचओ शिवपुरी सहित सिद्धि विनायक अस्पताल को लीगल नोटिस दिया है। नोटिस में लिखा है कि 15 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं किए जाने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
यह था मामला
दरअसल, मई में कमलागंज निवासी नीलू चौहान कोरोना पॉजिटिव होने के बाद इलाज के लिए सिद्धि विनायक अस्पताल में भर्ती हुई थी। हालत बिगड़ता देख, महिला को जिला अस्पताल और जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रैफर किया गया। लेकिन मेडिकल कॉलेज जाने से पहले ही महिला की मौत हो गई। इसके बाद सिद्धि विनायक अस्पताल की एम्बुलेंस का ड्राइवर महिला की लाश को घर के बाहर छोड़कर भाग आया। शव पूरा एक दिन घर के बाहर रखी रही, बाद में नगर पालिका ने महिला का अंतिम संस्कार कराया। महिला के घर पर परिजन के नाम पर सिर्फ 3 छोटे बच्चे हैं। कुछ सालों पहले महिला के पति की भी मौत हो गई थी। मामले की गंभीरता और अस्पताल की लापरवाही देख अधिवक्ता स्वप्निल और अभय ने अब मामले में नोटिस जारी किया है।
क्या हुई लापरवाही
कोविड नियमों के अनुसार अगर किसी की मौत हो जाती है, तो मृतक के शव को परिजनों को न सौंप कर नगर पालिका रीति-रिवाज के साथ मृतक का अंतिम करेगी। वहीँ इस मामले में महिला की मौत के एम्बुलेंस चालक महिला के शव को घर के बाहर छोड़ आया। जिस वजह से संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया था।
लाइसेंस निरस्त करो, कराओ एफडी
नोटिस में लिखा गया है कि आप अगर 15 दिन के भीतर नोटिस पर कार्रवाई करते हुए अस्पताल का लाइसेंस निरस्त नहीं करते हैं और इसी समय सीमा में मृतिका के तीनों बच्चों के नाम 15-15 लाख की एफडी नहीं करवाते हैं, तो मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।

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