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मानसून : MP में मानसून की सुकून 20 दिन बूंदाबांदी से लेकर रिमझिम होगी


 

मध्यप्रदेश के लिए मानसून से अच्छी खबर है। अभी तक 20 से बने सिस्टम को ही अंतिम सिस्टम माना जा रहा था, लेकिन अब दो और सिस्टम तैयार होने की उम्मीद बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि यह ज्यादा मजबूत नहीं होंगे, लेकिन इससे अगले 20 दिन तक बारिश होने की उम्मीद बन गई है। इसका प्रभाव, महाकौशल, बुंदेलखंड, ग्वालियर चंबल संभाग और मलवा निमाड़ में ज्यादा रहेगा। भोपाल में भी 22 सितंबर से बारिश के बादल बन रहे हैं। अरब सागर और बंगाल की खड़ी दोनों तरफ से सिस्टम आने से कुछ बारिश की उम्मीद है।

यह सिस्टम बारिश करा रहा

वर्तमान में तटीय तमिलनाडु और पूर्वी राजस्थान के ऊपर चक्रवातीय गतिविधियां अभी भी सक्रिय है। जबकि गंगीय पश्चिम बंगाल के ऊपर अवस्थित चक्रवातीय एक्टिविटी प्रभावशाली होकर निम्न दाब क्षेत्र बन गया है। मानसून ट्रफ जैसलमेर, कोटा, गुना, सीधी और रांची से होते हुए निम्न दाब क्षेत्र से लेकर पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी तक फैली है। पश्चिम बंगाल के ऊपर सक्रिय निम्न दाब क्षेत्र से उड़ीसा-तेलंगाना तक अन्य ट्रफ लाइन गुजर रही है। पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के आसपास एक ट्रफ के रूप में सक्रिय है।

अब मजबूत सिस्टम बना

वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि वर्तमान में बंगाल की खाड़ी और उड़ीसा तट के बीच निन्म दबाव का क्षेत्र मजबूत हुआ है। इस कारण वहां से लगातार नमी आ रही है। इसी कारण जबलपुर, बंदेलखंड और बघेल खंड के साथ ग्वालियर-चंबल संभागों में बारिश अभी हो रही है। दो तीन वहां बारिश रहेगी। ट्रफ लाइन ग्वालियर, सागर और रीवा संभागों (उत्तरी मध्यप्रदेश) से जा रही है। राजस्थान के ऊपर एक चक्रवातीय घेरा है। यह भी स्ट्रांग हुआ है। इस कारण अरब सागर से नमी आ रही है, इसलिए इंदौर और उज्जैन संभागों में कुछ जगहों पर भारी बारिश है। भोपाल समेत प्रदेश भर में बुधवार से हल्की से भारी बारिश है। यह सिस्टम 25 सितंबर तक इसी तरह बारिश होगी।

दो सिस्टम और तैयार हो रहे

मौसम विभाग पहले करीब 5 अक्टूबर के आसपास मानसून की विदाई मान रहा था, लेकिन दो और सिस्टम के बनने की स्थिति को देखते हुए अब विदाई की अभी संभावना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार अभी के सिस्टम से प्रदेश भर में 25 तक बारिश होगी। इसके बाद 28 को नया सिस्टम बन रहा है। इसके कारण अगले एक सप्ताह तक रिमझिम और फिर एक और सिस्टम के तैयार होने की उम्मीद है। इस कारण अभी कम से कम 20 दिन और बारिश हो सकती है।

प्रदेश में एक इंच पानी कम गिरा

प्रदेश में अभी लगभग सामान्य बारिश मानी जा रही है। हालांकि अब भी करीब एक इंच पानी कम गिरा है। अब तक करीब 37 इंच बारिश होना चाहिए थी, जबकि हुई 36 इंच हुई है। यह सामान्य से करीब 2% कम है।

इन जिलों के कारण कोटा पूरा नहीं हो पाया

पूर्वी मध्यप्रदेश के बालाघाट, छतरपुर, दमोह, जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, पन्ना, सागर, सिवनी और सतना समेत लगभग सभी जिलों में 15 से लेकर 60% तक कम पानी गिरा है। सिर्फ सिंगरौली में ही सामान्य से 50 % बारिश अधिक हुई है। इन जिलों में इस दौरान करीब 41 इंच बारिश होना चाहिए थी, लेकिन कुल 33 इंच पानी गिरा है। यह सामान्य से 16% कम है।

यहां बारिश ज्यादा हुई

पश्चिम मध्यप्रदेश यानी आगर-मालवा, अशोक नगर, भिंड, गुना, नीमच, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में 40 से लेकर 101% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। इसके अलावा भी अधिकांश जिलों में सामान्य बारिश रही है। सिर्फ धार, होशंगाबाद, खरगोन, बड़वानी, इंदौर और हरदा जिले हैं, जहां सामान्य से कम बारिश हुई है। भोपाल समेत कुछ अन्य इलाकों में सामान्य बारिश रही है। अब तक सीजन में करीब 33 इंच बारिश होना चाहिए, लेकिन 37 इंच बारिश हो चुकी है। इस कारण प्रदेश की हालत कुछ ठीक हैं।ccc

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