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भोपाल की धरती के गर्भ में मिट्‌टी इतनी प्यासी कि सोख सकती है 32 बड़े तालाबों जितना पानी

 


भोपाल शहर और इसके चारों ओर मौजूद हुजूर तहसील के गांवों की धरती के नीचे मौजूद चट्‌टानों के बीच इनता खाली स्पेस और प्यासी मिट्‌टी (असंतृप्त स्थान) है कि इसमें बड़े तालाब से लगभग 32 गुना अधिक पानी भू-जल भंडार के रूप में जमा किया जा सकता है। भारत में ग्राउंड वाटर की मॉनिटरिंग और इसे बढ़ाने के लिए काम करने वाली सर्वोच्च संस्था केंद्रीय भू-जल भंडार बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के आंकड़े यही कह रहे हैं।

सीजीडब्ल्यूबी की ओर से पहली बार तैयार किए गए मास्टर प्लान फोर आर्टिफिशियल रीचार्जिंग ऑफ ग्राउंड वाटर 2020 में वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर यह दावा किया गया है कि भोपाल की धरती के नीचे 3195 मिलियन क्यूसेक मीटर (एमसीएम) पानी जमा करने लायक अन-सेचुरेटेड जोन (असंतृप्त क्षेत्र) मौजूद है।

यह पानी कितना होगा, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि बड़े तालाब को पूरा भरने पर केवल 100 एमसीएम पानी समाता है। भोपाल में 64 एमसीएम भंडारण क्षमता का सब-सरफेस स्पेस (धरती के नीचे के खाली स्थान) को हर साल कृत्रिम रूप से वाटर हार्वेस्टिंग कर भर सकते हैं। इसे भरने के लिए सालाना 85 एमसीएम अतिरिक्त पानी की जरूरत पड़ेगी जो हमारे पास उपलब्ध है।

  • ग्राउंड वाटर रीचार्जिंग पर केंद्रीय भू-जल भंडार बोर्ड ने जारी किए ताजा आंकड़े

2772 वर्ग किमी शहर का कुल क्षेत्रफल, इसमें 1284 को ग्राउंड-वाटर रीचार्जिंग के लिए सही माना

  • 3195 एमसीएम पानी जमा करने लायक अन-सेचुरेटेड जोन है।
  • 80 एमसीएम पानी हर साल झील-तालाब भरने के बाद बेकार में बहा दिया जाता है। इसी पानी का उपयोग इस मास्टर प्लान में बताया है।

भोपाल में : 1.19 लाख मकानों की छतों पर रोकना होगा बारिश का पानी

अनुमानित खर्च - 238 करोड़ रुपए

भोपाल शहर में औसतन 50 वर्गमीटर एरिया वाले भवनों कुल 1 लाख 19 हजार रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने होंगे। इन सभी छतों का कुल क्षेत्रफल 5.95 वर्ग किलोमीटर होता है यानी फुटबॉल के एक हजार मैदानों के बराबर। रूफ-टॉप वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए सालाना 7 एमसीएम (700 करोड़ लीटर या 1849.20 एमजीडी) बारिश का पानी रोका जा सकता है। भोपाल शहर को रोजाना 100 एमजीडी पानी सप्लाई होता है, यानी शहर की 18 दिन की सप्लाई के बराबर।

गांवों में : 1144 स्थानों पर चेकडैम और 1179 नाला बंधान की जरूरत

अनुमानित खर्च - 124.4 करोड़ रुपए

शहर के चारों और खासकर दक्षिणी हिस्से में भू-जल संवर्धन सर्वाधिक संभावनाएं हैं। यहां धरातल पर कुछ नई संरचनाएं बनाकर और कुछ पुरानी की मरम्मत कर 73 एमसीएम का भू-जल भंडार हर साल बढ़ा सकते हैं। इसके लिए 1144 स्थानों पर चेकडैम और रीचार्ज शाफ्ट, 189 स्थानों पर ग्रामीण तालाबों की मरम्मत, 139 स्थानों पर पर्कुलेशन टैंक, 1179 स्थानों पर नाला बंधान करने की जरूरत बताई गई है।

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