फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अब सैंपल लेना बंद किया।
सरकार के दो विभाग। एक, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और दूसरा, आबकारी विभाग। दोनों को शराब में मिलावट रोकने के लिए सैंपलिंग के अधिकार दिए गए हैं। लेकिन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की बात करें तो उसने 2019 से अभी तक पिछले तीन साल में सिर्फ भोपाल समेत प्रदेशभर में कुल 84 सैंपल शराब के लिए हैं।
इसमें 59 सैंपल की जांच में पास मिले। जबकि 18 की रिपोर्ट फेल आई। अफसरों ने ये रिपोर्ट फाइल में कहीं दबाकर रख दी। यही कारण है कि भोपाल समेत प्रदेशभर में शराब में मिलावट की जांच बंद हैं और इसका खामियाजा आम लोगों को जान देकर गंवाना पड़ रहा है।
राजधानी में 92 अंग्रेजी और देशी शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं। लेकिन एक भी कारोबारी ने अब तक फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के नियमों के तहत फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से फूड लाइसेंस नहीं लिया है। यह ही स्थिति प्रदेश में शराब बेचने वाले कारोबारियों की भी है। ये लाइसेंस लेते नहीं और न ही फूड इंस्पेक्टर सैंपल लेते हैं।
नकली एवं मिलावटी शराब की बिक्री न हो, इस पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने फूड सेफ्टी एक्ट में 2006 में बदलाव कर दिया था। इसे 2011 में लागू कर दिया गया। ये एक्ट लागू होने के बाद कई बार फूड डिपार्टमेंटों को शराब के सैंपल लेने के अधिकार दिए गए हैं। साथ ही शराब कारोबारियों को फूड लाइसेंस लेना जरूरी कर दिया गया है।
दोनों विभागों के बीच नहीं है समन्वय
- 92 अंग्रेजी और देसी शराब की दुकानें हैं राजधानी में
- 40 दुकानों से लिए गए थे जांच के लिए सैंपल
भोपाल लैब से सैंपल लौटाए तो इंदौर भेजे गए जांच के लिए
सरकार का दूसरा विभाग आबकारी विभाग है। जुलाई में इंदौर में 5 लोगों की मौत मिलावटी शराब पीने से होने के बाद भोपाल में अगस्त में आबकारी विभाग की टीम ने शहर की 40 शराब दुकानों से 35 सैंपल लिए गए थे। इसमें एमडी, रॉयल स्टेग, रॉयल चैलेंज, ब्लेंडर्स ब्रांड के सैम्पल जांच के लिए भेजे गए थे।
ये सैंपल सबसे पहले भोपाल में भदभदा रोड स्थित एफएसएल लैब में भेजा, लेकिन यहां पर जांच नहीं हो पाने की बात कहकर सैंपलों को लौटा दिया गया। इसके बाद इन सैंपलों को जांच के लिए इंदौर की एफएसएल लैब में भेजा गया है। लेकिन आलम ये है कि अब तक इन सैंपलों की जांच रिपोर्ट नहीं आ पाई है।
आबकारी विभाग ने कारोबारियों को लाइसेंस लेने के दिए निर्देश
केंद्र सरकार के नियम की दुहाई देकर फूड डिपार्टमेंट के बेबस अफसर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आबकारी विभाग को पत्र लिखकर फूड लाइसेंस कारोबार के लिए लेने के बात कह रहे हैं। फूड डिपार्टमेंट के पत्र के जवाब में आबकारी विभाग के अफसरों ने भी कारोबारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लाइसेंस लेकर कारोबार करें।
लेकिन न तो कारोबारी आबकारी विभाग की सुन रहे हैं और न ही फूड डिपार्टमेंट के अफसरों के आदेश को मान रहे हैं। इस एक्ट को लागू करने के पीछे फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के सेफ्टी ऑफिसर ने बताया कि फूड लाइसेंस लेने पर शराब की क्वालिटी के सैंपल लेकर जांच कराई जा सकती है।
जिम्मेदारों के जवाब- विभाग को कई पत्र लिख चुके
शराब की फैक्टरी का संचालन करने वाले संचालकों को बताया गया था कि उनको लाइसेंस लेना होगा। ज्यादातर फैक्टरी संचालकों ने लाइसेंस लिए लेकिन रिटेल दुकानदार ने कितने लाइसेंस लिए हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। - अभिषेक दुबे, संयुक्त संचालक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन
सैंपल लिए थे, रिपोर्ट नहीं आई
भोपाल में शराब के कई ब्रांडों के सैम्पल लिए गए गए थे। लेकिन इनको जांच के लिए पहले भदभदा स्थित लैब में भेजा गया था। लेकिन वहां पर सैंपल की जांच नहीं हो पाने की बात कही गई। इसलिए उसे इंदौर की लैब में भेजा गया है। अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। - सजेंद्र मोरी, कंट्रोलर आबकारी भोपाल
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