कन्या भोजन के बाद
बिर्रा-दीवान मोहल्ला में नौ दिनों से विराजी मां दुर्गा नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा कर मां का ये स्वरूप भक्तों को सिद्धि प्रदान करता है।नवमी तिथि को घटस्थापना की तिथि यानी नवरात्रि के पहले दिन की तरह ही महत्वपूर्ण माना जाता है। नवमी के दिन मां को प्रसन्न करने के लिए विधिवत तरीके से पूजा अर्चना कर नवमी के दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। नवरात्रि के नौवें दिन नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया गया। (ज्ञ्ञ्ञ्ञ्दू)हिंदू धर्म में इसका बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन 10 साल से कम उम्र की कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में कन्या पूजन के बाद ही भक्तों के नवरात्र व्रत संपन्न माने जाते हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि की नवमी 14 अक्टूबर को पड़ी ये नवरात्रि पूजा का आखिरी दिन था।
कुछ लोग मां दुर्गा को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए नौ दिन उपवास रखते थे तो कुछ पहले और आखिरी दिन व्रत रखकर मां की उपासना करते रहे कहते हैं कि मां दुर्गा के ये व्रत संपन्न तभी माने जाते हैं, जब कन्या पूजन किया जाता है। देवी की तरह इन कन्याओं की पूजा किया गया।
इसके बाद महामाई के भक्तों ने श्रद्धा के साथ घरों में कन्या-लांगुराओं का विधिविधान से पूजन किया। कन्या लांगुराओं को भोजन ग्रहण कराकर उन्हें दक्षिणा एवं उपहार भेंट कर नौ दिन से चले आ रहे अपने व्रत खोले।
इस शुभ अवसर पर आचार्य नवरतन पाण्डेय,मुख्य जजमान पार्वती गोलू धीवर,राजमहल बिर्रा से विजय बहादुर सिंह, रितेश रमण सिंह, चेतन प्रताप सिंह, पीयूष देव सिंह, प्रतीक प्रताप सिंह,सौंखी लाल पटेल,सोनू यादव,
एकांश पटेल,सुरेंद्र,मधुबनिया,मनराखन धीवर,सुदेश,टिंकू केशरवानी,अवि,गणेश,शुभम,बजरंग केशरवानी,संजय पटेल,फिरत,बजरंग,कोमिला पटेल,ललिता,पूजा,संतोषी धीवर,ज्योति,खुशबू केशरवानी उपस्थित थे।
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