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MP : पेपर मैसी वर्किंग समिति से जुड़ी जनजाति की महिलाओं की बदली तकदीर


मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन सोसायटी की ऋण राशि से रातापानी अभयारण्य के अंतर्गत पेपर मैसी वर्किंग समिति से जुड़ी जनजाति की 10 महिलओं का जीवन स्तर सुधरा है। इन्हें सालाना औसतन 70 से 75 हजार की आमदनी होने लगी है।

जनजाति की यह महिलाएँ पहले 14 किलोमीटर पैदल चलकर जंगल से लकड़ी काट सिर पर रख बमनई से औबेदुल्लागंज बेचने आया करती थी। वन विभाग की वन रक्षक सुश्री शशि अहिरवार ने इन महिलाओं को दिक्कतों से निजात दिलाने और जंगल बचाने के उद्देश्य से वरिसा विभागीय अधिकारियों के समक्ष ग्राम बमनई में पैपर मैसी वर्किंग समिति बनाने प्रस्ताव रखा।

समिति और महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिलाया। प्रशिक्षण बाद सामग्री तैयार होने लगी पर सामग्री विक्रय का कोई जरिया नहीं रहा।

वन मंडल औबेदुल्लागंज ने इन महिलाओं को विभिन्न स्थलों पर हुए आयोजन में मंच प्रदान किया। इन महिलाओं के कौशल उन्नयन के लिए आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण दिलाया गया। इस बीच पिछले 2 साल में कोविड-19 के कारण इन महिलाओं द्वारा तैयार सामग्री को बेचने से वंचित रहीं। वन विभाग की म.प्र. टाइगर फाउंडेशन सोसायटी ने आगे आकर इस समिति को 25 हजार रूपये का ऋण उपलब्ध कराया। इससे महिलाओं ने पुन: कार्य प्रारंभ किया और वन मेले में स्टाल लगा लिया। इससे इन महिलाओं की आमदनी में इजाफा हुआ।

पेपर मैसी वर्किंग समिति की महिलाओं ने शुक्रवार को भोपाल आकर प्रधान मुख्य वन संरक्षण एवं फाउंडेशन सचिव श्री जसबीर सिंह चौहान से भेंटकर ऋण राशि का 60 प्रतिशत राशि का चैक भेंट किया। श्री चौहान ने जनजाति की महिलाओं द्वारा की गई मेहनत की प्रशंसा करते हुए महिलाओं को आगे आने का आव्हान किया। समिति की महिलाओं ने बताया कि समिति को जो लाभ मिलता है उसका 5 प्रतिशत ईको विकास समिति बमनई को दिया जाता है

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