.शिवपुरी जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर मझेरा में आमडार आदिवासी बस्ती की 25 से 30 परिवार सुविधाओं को मोहताज हैं। गांव से डेढ़ किमी दूर फोरलेन हाइवे किनारे वन भूमि में नई बस्ती बसाने के नाम पर 25 आवास गुणवत्ताहीन बना दिए। आदिवासी परिवार नई बस्ती में रहने पहुंचे तो दूरी व हाइवे के चलते बच्चों का स्कूल छूट गया। हालात यह हैं कि छह महीने से नौनिहालों के पोषण आहार नहीं मिल पा रहा है।
शिवपुरी जनपद की ग्राम पंचायत मझेरा में कच्चे घरों में दबंगों से परेशान 25 सहरिया परिवारों काे डेढ़ किमी दूर कोटा-झांसी फोरलेन हाइवे किनारे वन भूमि पर अलग से 25 आवास बनाकर साल 2016 में बसा दिया गया। विशेष पिछड़ी सहरिया जनजातियों के लिए सेटलमेंट आवास योजना के तहत 30 लाख रु. की लागत से आवास बनाए गए।
निर्माण एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) शिवपुरी ने ठेकेदार से गुणवत्ता युक्त काम नहीं कराया। यह परिवार पहले साल रहने पहुंचे तो बरसात में छतों से पानी टपकने लगा। वहीं बस्ती से स्कूल डेढ़ किमी दूर और ऊपर से फोरलेन हाइवे के चलते बच्चों का स्कूल छूट गया। आरटीई कानून के बावजूद बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही। इसके अलावा आंगनबाड़ी बहुत दूर होने से नौनिहालों को नियमित पोषण आहार नहीं मिल रहा है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग जिम्मेदार है।
सहरिया परिवारों की समस्याओं के लिए ये पांच विभाग जिम्मेदार, इसलिए परेशान हैं लोग
1. आदिम जाति कल्याण विभाग- बरसात में छत पर तिरपाल बिछाते, झोपड़ी जैसे हालात
सहरिया अभिकरण के तहत 25 आवास बनाए गए। ठेकेदार ने छत पर प्लास्टर नहीं कराया। फर्श भी कच्चा छोड़ दिया। बरसात में पानी टपकता आ रहा है। मंगल सिंह ने बताया कि हर बार तिरपाल बिछाकर काम चलाते हैं। आवास, झोंपड़ी जैसे लगते हैं। कमरे व किचिन में कहीं भी अलमारी तक नहीं रखी है।
2. ग्रामीण यांत्रिकी सेवा- विभाग के कार्यपालन यंत्री सहित सब इंजीनियर और एई जिम्मेदार
सहरिया आवास बनाने के लिए आरईएस को काम सौंपा गया था लेकिन ठेकेदार ने काम गुणवत्ता अनुरूप नहीं किया। कार्यपालन यंत्री से लेकर सब इंजीनियर और एई द्वारा निर्माण पूरा बताकर आदिम जाति कल्याण विभाग को हैंडओवर कर दिया। बिना देखे आवासों में परिवारों को भेज दिया।
3. स्कूल शिक्षा विभाग- फोरलेन पार बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं
गांव से दूर जंगल में रोड किनारे आवासीय बस्ती बसा देने से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। कोटा-झांसी फोरलेन हाइवे पार करके बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं हैं। आमडार बस्ती के बच्चे आज शिक्षा से भी बंचित हैं।
4. महिला एवं बाल विकास विभाग- नौनिहालों को आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधाएं नहीं
आमडार बस्ती में छह साल से जीवन यापन कर रहे परिवारों के नौनिहालों को आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधाएं से बंचित रहना पड़ रहा है। विभाग छह साल में भी बच्चों को सुविधाएं नहीं पहुंचा पाया है। जबकि इसे लेकर परिवार गुहार लगा चुके हैं।
5. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग- घरों में ताले लगा रोजगार के लिए पलायन किया
आमडार आदिवासी बस्ती के परिवारों को ग्राम पंचायत से रोजगार नहीं मिल रहा है। जबकि मनरेगा के तहत कई काम कराए गए हैं। फसल कटाई का सीजन है, इसलिए कुछ परिवार घरों में ताले लगाकर रोजगार के लिए पलायन करके मुरैना गए हैं।
आवासों की गुणवत्ता खराब है
आवासों का निर्माण मेरे समय में नहीं हुआ है। आवासों की गुणवत्ता खराब है तो इसकी हम दिखवाएंगे। जांच कराएंगे, जो भी जिम्मेदार होगा कार्रवाई करेंगे।
-राजीव पांडेय, कार्यपालन यंत्री, आरईएस, शिवपुरी
मिनी आंगनबाड़ी का प्रस्ताव भेजेंगे
मझेरा की आदिवासी बस्ती के लिए अलग से मिनी आंगनबाड़ी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजेंगे।

0 टिप्पणियाँ