"जौहरी की गति जौहरी जाने की जिन जौहर होय"। इस उक्ति को चरितार्थ कर रही छाया डडसेना जिन्होंने 2016 में सड़क हादसे में अपना दाहिना हाथ खो दिया, फिर भी उन्होंने हिम्मत न हारकर वर्तमान में स. शि. मं. बम्हनीडीह में आचार्या के रूप में बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने हेतु उनके लिए " मेरे उभरते सितारे" नाम का एक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसमे बच्चे जिस विधा में अच्छे हैं उस विधा के कार्यक्रम में उन्हें भाग लेवाकर व पुरुस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन कर रही हैं।इसके लिए आसपास के स्कूलों में व घरों में जाकर दिव्यांग बच्चों एवं उनके पालकों व शिक्षकों के सहयोग से इस कार्यक्रम को स्वस्फूर्त चला रही हैं। इस कड़ी की शुरुवात में उन्होंने तुल्य जायसवाल, माधवी, देव, यामिनी व अरुण को इस कार्यक्रम में सम्मिलित कर उन्हे पुरुस्कार प्रदान किया। इनके द्वारा शुरू किया गया यह पहल न केवल दिव्यांग बच्चों को आगे बढ़ा रही अपितु उन्हे समाज में सम्मानपूर्वक जीने के लिए प्रेरित भी कर रही है। आगे वे इस कार्यक्रम को और विस्तृत रूप में करने की योजना में हैं ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगजन अपने आप को सामने ला सकें। और आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर सके ।

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