असम से शुरू हुआ भाजपा का ‘हिंदू अल्पसंख्यक’ दांव देश की सियासी समीकरण बदल सकता है। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि जहां हिंदू कम हैं, वहां उन्हें अल्पसंख्यक घोषित कर सकते हैं। असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कौन अल्पसंख्यक हैं, कौन नहीं, इसका फैसला जिला स्तर पर करेंगे।
देश के 102 जिलों पर सीधा असर होगा
देश में 775 जिले हैं। 2011 में जब जनगणना हुई थी, तब 640 जिले थे। जिलेवार एनालिसिस करें तो पता चलता है कि देश के 102 जिलों में हिंदू आबादी अन्य धर्मों के लोगों से कम है। यानी, असम मॉडल देश में लागू हुआ तो इन जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक घोषित हो सकते हैं।
15 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के सभी जिलों में हिंदू बहुसंख्यक
जिलों के हिसाब से देखें तो यूपी के रामपुर, बिहार के किशनगंज, केरल के मल्लापुरम और पश्चिम बंगाल के तीन जिलों तथा जम्मू-कश्मीर के 18 जिलों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के अनुसार, 90 जिलों, 66 कस्बों और 710 प्रखंडों में अल्पसंख्यकों की आबादी ज्यादा है। सरकारी परिभाषा के अनुसार देश में 6 समुदाय अल्पसंख्यक हैं। मुस्लिम 14.2%, ईसाई 2.3%, सिख 1.7%, बौद्ध 0.7%, पारसी 0.006% और जैन 0.4 % है।
2500 करोड़ रु. बजट का मिल सकता है फायदा
अल्पसंख्यकों को सबसे ज्यादा मदद शिक्षा के क्षेत्र में मिलता है। 10वीं तक प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप, 11वीं से पीएचडी तक पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप {मौलाना आजाद नेशनल फैलोशिप स्कीम के तहत यूजीसी, एनईटी आदि के लिए आर्थिक मदद जैसे- नया सवेरा योजना और पढ़ो परदेश योजनाएं, इनसे उच्च शिक्षा में आर्थिक मदद मिलती है।
एक्सपर्ट व्यू: जिस वर्ग की सुविधाएं छिनेंगी, उन्हें दिक्कत तो होगी ही
CSDS के संजय कुमार के मुताबिक किसी जिले या राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर घोषित अल्पसंख्यकों को सुविधाओं के दायरे से बाहर किया जाएगा तो उन्हें दिक्कत होगी। फॉर्मूला क्या होगा, इसके आधार पर ही स्थिति साफ होगी।

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