प्रदेश के किसानों से हरियाणा सरकार द्वारा समर्थन मूल्य से कम पर 22 हजार टन गेहूं खरीदने के मामले में दोनों सरकार आमने-सामने है। मप्र के कृषि मंत्री कमल पटेल ने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। मंत्री पटेल का कहना है कि जरूरत पड़ी तो किसानों को धोखे में रखकर उनकी उपज का कम मूल्य देने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ एफआईआर भी कराई जाएगी।
उधर, हरियाणा स्टेट को ऑपरेटिव सप्लाय एंड मार्केटिंग फेडरेशन (हैफेड) के एमडी ए श्रीनिवासन ने दो टूक कहा है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करना मप्र सरकार की जिम्मेदारी है, हमारी नहीं। हमें तो मंडी में जिस भाव पर गेहूं मिला, खरीदा है। जबकि गत अक्टूबर माह में हरियाणा की राज्यमंत्री कमलेश ढंडा ने कैथल अनाज मंडी में समर्थन मूल्य से कम में धान खरीदी पर नाराजगी जताते हुए अफसरों पर कार्रवाई की थी।
समर्थन मूल्य से कम दाम पर खरीदी हुई है, गलती हमारी नहीं- ए श्रीनिवास, एमडी, हरियाणा (हैफेड)
- हमने इंदौर सहित मप्र की पांच मंडियों से की गई गेहूं की खरीदी के मामले को दिखवाया है। वहां से समर्थन मूल्य से कम दाम में खरीदी तो हुई है।
- हमने तो मंडी की नीलामी में जो बोली लगी उसी पर खरीदी की है। हो सकता है, बोली कम की लगी हो।
- वैसे भी अगर मंडी में बोली समर्थन मूल्य से कम की लगी हो तो इसमें हमारी कोई गलती नहीं। समर्थन मूल्य पर खरीदी को सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी नहीं है। यह काम मप्र सरकार का है।
जिसने भी कम दाम पर खरीदी की है, उन पर एफआईआर दर्ज कराएंगे
किसानों से धोखा करनेे वाले व्यापारियों पर भी केस करेंगे- कमल पटेल, कृषि मंत्री, मप्र
- किसानों के साथ इस तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समर्थन मूल्य सरकार की तरफ से किसानों को दिया जाने वाला उनकी उपज का उचित मूल्य है।
- उससे कम में किसानों से गेहूं की खरीदी की जांच की जाएगी। इसमें जो भी अफसर या एजेंसी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- अगर जरूरत पड़ी तो किसानों को धोखे में रखकर उनकी उपज का कम मूल्य देने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ भी एफआईआर कराई जाएगी।
किसानों को कुल 1 करोड़ 31 लाख कम मिले
हरियाणा सरकार ने मप्र की अलग-अलग मंडियों से 13 मई से 3 जून के बीच समर्थन मूल्य 2015 रुपए से कम 1900 से 2015 रुपए में गेहूं खरीदा। इंदौर और महू मंडी से 1 लाख 75 हजार क्विंटल गेहूं खरीदा गया। प्रति क्विंटल औसत 75 रुपए भी कम मिलना माना जाए तो भी किसानों को लगभग 1 करोड़ 31 लाख 25 हजार रुपए कम मिले।
किसानों से खरीदे माल का सैंपल भी नहीं रखा
मप्र कृषि विपणन बोर्ड के एमडी विकास नरवाल ने 3 नवंबर 2021 को आदेश में कहा था कि मंडी में उपज की नीलामी समर्थन मूल्य से ही शुरू होगी। अगर नीलामी समर्थन मूल्य से कम दर पर होती है तो उपज का नमूना सुरक्षित रखा जाएगा। हैफेड ने जिस गेहूं की खरीदी समर्थन मूल्य से कम में की है उसके नमूने नहीं रखे गए हैं

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