खरगोन जिले के बड़वाह में काटकूट के पास सुकड़ी नदी में रविवार को आई बाढ़ में 13 लग्जरी कारें बह गई। रविवार देर रात तक ग्रामीणों की मदद से 9 गाड़ियां निकाली जा चुकी थी, शेष 4 गाड़ियां सोमवार सुबह निकाली गई। 3 गाड़ियां तो बहते हुए 2 किमी आगे निकल गई थी। सभी लग्जरी हैं। इंदौर से कुछ फैमिली बर्थडे पार्टी मनाने यहां आई थी। ये लोग नदी में पार्टी मना रहे थे। स्थानीय लोगों ने इन्हें समझाया भी कि नदी में जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है, लेकिन वे नहीं माने। हालांकि इन लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। वहीं नदी में बही गाड़ियों को भी ग्रामीणों की मदद से बाहर निकाल लिया गया। इस हादसे के पीछे बड़ी लापरवाही सामने आई। दैनिक भास्कर ने हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों से और इंदौर के उन परिवारों से भी बात की।
पहले पढ़िए प्रत्यक्षदर्शियों से हादसे के पीछे की पूरी कहानी..उन्हीं की जुबानी...
इंदौर से बर्थडे पार्टी मनाने के लिए 30 से अधिक लोग 13 गाड़ियों से अपने परिवार के साथ बड़वाह के पास काटकूट आए थे। इनमें 10 बच्चे भी थे। यहां से 8 किमी दूर सुकड़ी नदी है। इनमें से कुछ लोग नदी में पत्थरों पर अपनी गाड़ियां दौड़ा रहे थे। कुछ लोग रेस लगा रहे थे। बीच नदी में टेंट लगाकर खाने के लिए टेबल भी लगी थी। सभी बर्थडे पार्टी में एंजाय कर रहे थे। डीजे भी लगा था। लोग मस्ती में झूम रहे थे। कुछ लोगों ने एक जैसी ड्रेस पहनी थी। इस नदी में अचानक ऊफरी क्षेत्र से पानी आ जाता है। इस कारण स्थानीय रहवासियों ने इन्हें समझाया कि नदी का जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है। किसी ने ध्यान नहीं दिया। रविवार दोपहर के करीब 3.30 बजे सुकड़ी नदी से लगे नाले में पानी आ गया। जलस्तर बढ़ा तो हमने उन लोगों को फिर समझाया। हमारी किसी ने नहीं सुनी। अचानक नदी में तेजी से पानी बढ़ने लगा। नदी में पार्टी मना रहे लोग घबरा गए। अपना सामान और कार छोड़कर भागने लगे। (जैसा स्थानीय रहवासी अरविंद बर्डे, दिलीप ने दैनिक भास्कर को बताया
टेंट का सामान और डीजे भी बह गया: व्यवसायी
ओखला के टेंट व्यवसायी सुभान ओछ्बारे ने बताया कि सुबह मेरी दुकान पर आकर इंदौर के लोग 50 कुर्सी, टेंट खाना बनाने के बर्तन आदि ले गए थे। किसी कुणाल नाम के व्यक्ति का फोन भी आया था। घटना के बारे में पता लगने पर जब हम मौके पर पहुंचे तो टेंट का सामान और बर्तन बह गए थे। इस पूरी घटना में करीब 30 हजार से अधिक का नुकसान हो गया है। ये लोग पहले भी दो बार यहां आ चुके हैं।
इंदौर के डीजे संचालक को किया गिरफ्तार: पुलिस
बलवाड़ा टीआई एसआर चौहान बताते हैं कि इंदौर के कुछ लोग पार्टी मनाने यहां आए थे। कुछ नदी में गाड़ी घुमा रहे थे। इसी दौरान ऊपरी क्षेत्र से अचानक नदी में पानी बढ़ गया, इसके बाद सभी भाग गए। लेकिन, वे कार नहीं निकाल पाए थे। घटना के बाद शाम को एसडीएम बीएस कलेश भी मौके पहुंचे। मौके पर एक व्यक्ति अर्जुन पिता प्रफुल्ल दशोरा निवासी साकेत नगर पलासिया इंदौर को गिरफ्तार किया है। ये डीजे संचालक है।
अब पढ़िए इंदौर से पिकनिक मनाने आए परिवार वालों ने क्या कहा
अचानक सैलाब आया, कुछ समझ नहीं आया: इंदौर की एक फैमिली
इंदौर से हम फैमिली के साथ पिकनिक मनाने बड़वाह के आक्या पहुंचे थे। कुछ गाड़ियां काटकूट नदी के किनारे तो कुछ बीच में पार्क थी। जब हम नदी में पहुंचे तब उसमें पानी नहीं था। दोपहर में बूंदाबांदी हो रही थी। अचानक पानी का सैलाब आया। देखते ही देखते जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। यह देख परिवार के लोग सहम गए। सभी बाहर निकलने लगे। हम लोगों ने पहले परिवार और बच्चों को किनारे पर भेजा। फिर कार से जरूरी सामान लेकर पहुंचे। कुछ लोगों को बाहर निकालने में ग्रामीणों ने भी मदद की। हालांकि कारें पानी में ही फंसी रह गई। शुक्र है कि हमारी फैमिली और बच्चे सब सुरक्षित हैं।
दूसरी बार गए थे, पहले नहीं मिला था पानी: अक्षय
नदी में बही कारों में एक कार अक्षय जैन की थी। अक्षय ने बताया कि वह यहां अपने दोस्तों और परिवार के साथ पिकनिक मनाने पहुंचे थे। सड़क के किनारे सभी ने अपनी कारें पार्क की थी। हम जब नदी में पहुंचे तब नदी में इतना पानी भी नहीं था कि बच्चों के जूते भी डूब जाएं। दोपहर में कुछ बूंदाबांदी हो रही थी। शाम को नदी में अचानक तेज बहाव आया। इस दौरान नदी में मौजूद हम सब लोग किनारे आ गए। लेकिन गाड़ियां अंदर ही रह गईं। भगवान का शुक्र है कि बच्चे और सभी लोग बच गए। हमें खरोंच भी नहीं आई। वह परिवार के साथ पहले भी यहां जा चुके हैं। लेकिन पहले कभी इतना पानी यहां नहीं मिला था।
मोबाइल कारों में ही रह गए: कुणाल
कुणाल अग्रवाल ने बताया कि वे इसके अलावा कई इलाकों में ऑफ रोडिंग के लिए जाते रहते हैं। रविवार को भी गए थे। हादसे के समय मौके पर ही मौजूद थे। मेरे सहित कई लोगों के मोबाइल भी कार में ही रह गए। पानी किस तरह और कहां से आया, उन्हें नहीं पता। इस तरह के हादसे चोरल व आसपास के इलाकों में होते रहते हैं।
दो साल पहले भी हुआ था हादसा, तब मांगी थी माफी
दो साल पहले नयापुरा के जंगलों में दो साल पहले कुणाल अग्रवाल, गुंजन पटेल सहित सौ से अधिक ऑफ रोडर गए थे। वन विभाग से अनुमति नहीं लेने के कारण इन्हें विभाग से माफी मांगना पड़ी थी। इतना ही नहीं वन विभाग को लिखित में माफीनामा सौंपकर कहा था कि अब कभी जंगल नहीं आएंगे। लेकिन इसके बाद भी यहां ऑफ रोडर्स का घूमना बंद नहीं हुआ। कुछ ऑफ रोडर्स 22 व 23 अगस्त 2020 की रात में ही पहुंच गए थे। इसे लेकर वन विभाग के अफसरों ने आपत्ति जताई थी।
यह है जंगल में प्रवेश का नियम
भारतीय वन अधिनियम 1927 और वाइल्ड लाइफ एक्ट के मुताबिक जंगल में प्रवेश निषेध है। लेकिन मप्र में लोग जंगलों को नजदीक से देख सकें इसलिए कुछ नियम तय किए गए हैं। इसके तहत निर्धारित शुल्क चुकाकर वन विभाग से अनुमति लेकर जंगल सफारी की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति रिजर्व फॉरेस्ट में घूमता पाया जाता है तो उसके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम-1927 के तहत केस दर्ज किया जाता है। इसमें सात माह की सजा और 5 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
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