डभरा-पूर्व गृहमंत्री एवं विधायक ननकी राम ने स्वीकार किया कि रमन सरकार ने 58 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में कमेटी के अनुशंसा को नहीं माना पूर्व गृहमंत्री एवं विधायक ननकी राम कंवर के प्रेस वार्ता पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस सचिव अजा विभाग राईस किंग खूंटे ने कहा कि भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पूर्व गृहमंत्री एवं रामपुर विधायक ननकी राम कंवर ने स्वीकार किया कि रमन सरकार के दौरान आरक्षण के संबंध में न्यायालय में जवाब देने,उनकी अध्यक्षता में गठित मंत्रीमंडलीय समिति के सिफारिश को नहीं माना और न्यायालय में भी समिति के सिफारिश को प्रस्तुत नहीं किया। ननकी राम कंवर के बयान से भाजपा के आरक्षण विरोधी चरित्र का उजागर हो गया। राज्य में लागू 58 प्रतिशत आरक्षण पर लगा रोक रमन सरकार की आरक्षण विरोधी,आदिवासी विरोधी,पिछड़ा वर्ग विरोधी,अनुसूचित जाति विरोधी होने का प्रमाण है। रमन सरकार ने न्यायालय में जो एफिडेविट फाइल किया,उसमे भी 58 प्रतिशत आरक्षण किस आधार पर दिया गया है, उसके लिए कमेटी गठन का जिक्र नहीं कर,न्यायलय को गुमराह किया और आरक्षित वर्ग को भी भ्रम में रखा। रमन सरकार न्यायालय में दिये एफिडेविट में कमेटी गठन का जिक्र किया होता तो वर्तमान में राज्य सरकार के द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत की गई ननकी राम कंवर कमेटी की अनुशंसा खारिज नहीं होती और राज्य में 58 प्रतिशत आरक्षण लागू होता।
प्रदेश कांग्रेस सचिव राईस किंग खूंटे ने कहा कि भाजपा की रमन सरकार ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए एक वर्ग के आरक्षण को बढ़ाया, वहीं दूसरे वर्ग के आरक्षण में कटौती कर दिया और वर्ग वर्ग के बीच मनभेद करते हुए,विवाद उत्पन्न कराकर,अपनी आरक्षण विरोधी मंशा को पूरा करने काम किया है। पूरा प्रकरण न्यायालय में जाने के बाद,माननीय उच्च न्यायालय ने 58 परसेंट आरक्षण को वापस 50 परसेंट कर दिया,तब भाजपा अपनी नाकामी छुपाने के लिए कांग्रेस सरकार पर मनगढ़ंत झूठा आरोप लगा रही है,जबकि रमन सरकार के दौरान न्यायालय में दी गई एफिडेविट में कमेटी गठन का जिक्र नहीं होने के कारण ननकीराम कंवर के अनुशंसा को अस्वीकार कर दिया गया,ऐसे में रमन भाजपा सरकार की आरक्षण विरोधी मंशा जगजाहिर हो गई है।
कांग्रेस सचिव राईस किंग खूंटे ने आगे कहा कि कांग्रेस की सरकार उच्च न्यायालय के फैसले खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेगी और आरक्षित वर्ग को उनके आरक्षण का लाभ देने के लिए मजबूती से पक्ष रखेगी। वैसे भी आरएसएस और भाजपा के नेता कई बार सार्वजनिक मंचों से आरक्षण को खत्म करने की बात कह चुके है।


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