मलेरिया निरोधक माह के अंतर्गत मलेरिया से बचाव और लक्षणों की जानकारी जागरूकता रथ के माध्यम से प्रसारित की जाएगी। रथ को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.प्रभाकर तिवारी और जिला मलेरिया अधिकारी श्री अखिलेश दुबे ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया । रथ में मलेरिया की जांच की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे बुखार से प्रभावित लोगों की जांच की जाएगी। यह रथ चार इमली, न्यू मार्केट, तुलसी नगर, एमपी नगर, हबीबगंज, अन्ना नगर, पिपलानी, गोविंदपुरा, कोलार, नीलबड, अशोक गार्डन, पंजाबी बाग, पुराना भोपाल, इंद्रपुरी, बरखेड़ा पठानी, बैरागढ़, गांधीनगर समेत भोपाल के कई स्थानों में पहुंचकर मलेरिया की जानकारी प्रसारित करेगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि साल 2016 में भारत सरकार द्वारा नेशनल फ्रेमवर्क फॉर मलेरिया एलिमिनेशन जारी किया गया है। इसके अंतर्गत पूरे देश में वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य एवं मलेरिया मुक्त क्षेत्र में पुनः संक्रमण रोकने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। मलेरिया प्रकरणों के आधार पर एनुअल पैरासाइटिक इनसिडेंस के अनुसार कैटिगरी 0,1,2 एवं 3 में श्रेणीबद्ध किया गया है, जिसके अंतर्गत मलेरिया नियंत्रण के लिए शीघ्र जांच एवं पूर्ण उपचार, घर-घर भ्रमण कर बुखार रोगियों की मलेरिया जांच के लिए सर्विलेंस, कीटनाशक युक्त मच्छरदानी का वितरण, कीटनाशक छिड़काव, लार्वा नियंत्रण के लिए गतिविधियां, प्रशिक्षण एवं सपोर्टिव सुपरविजन किया जा रहा है। मलेरिया का खतरा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा रहता है। तेज ठंड देकर बुखार, कंपकपी, सिर दर्द ,बदन दर्द, उल्टी होना मलेरिया को प्रमुख लक्षण है । गंभीर अवस्था में यह खून की कमी का कारण भी हो सकता है । यदि इसका शीघ्र एवं पर्याप्त उपचार नहीं लिया जाए तो मलेरिया से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। गर्भावस्था में मलेरिया गंभीर हो सकता है और जच्चा और बच्चा भी जान को भी खतरा हो सकता है। मलेरिया होने पर आरडीटी किट किट से जांच करवाकर मलेरिया उपचार नीति के अनुसार पूरा उपचार लेना आवश्यक होता है।
जिला मलेरिया अधिकारी श्री अखिलेश दुबे ने बताया कि प्रदेश में मलेरिया फैलाने वाले दो परजीवी प्लाज्मोडियम फेल्सीफेरम एवं प्लाज्मोडियम वाईवेक्स है। एनाफिलीज मच्छर रुके हुए साफ पानी में जैसे कि धान का खेत तालाब, गड्ढे,कृत्रिम जलाशय, छत पर बनी हुई टंकी, जल एकत्रित करने के लिए जमीन के अंदर बनी टंकी, अनुपयोगी कुंए, जलधारा के किनारे से एकत्र जल, नदियां, हैंड पंप, नल के आसपास जमा पानी, नहर में रुके हुए पानी इत्यादि में पनपता है।

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