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Shivpuri news : सहारा निवेशकों के मामले में EOW ने RTI पर रोकी जानकारी, अधिवक्ता ने दायर की प्रथम अपील



सहारा इंडिया समूह के डायरेक्टरों एवं अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज मामलों में की जा रही कार्रवाई की जानकारी मांगने पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल द्वारा सूचना देने से इंकार किए जाने के बाद शिवपुरी के अधिवक्ता रमेश मिश्रा ने प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर की है। मामला सहारा निवेशकों के हितों से जुड़ा होने के कारण एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

जानकारी के अनुसार अधिवक्ता रमेश मिश्रा ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ तथा पुलिस महानिदेशक कार्यालय को पूर्व में भेजे गए पत्रों पर की गई कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में विशेष रूप से सहारा समूह के डायरेक्टरों एवं अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज अपराधों और जांच की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।

EOW ने दिया यह जवाब

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई भोपाल के लोक सूचना अधिकारी द्वारा 29 मई 2026 को जारी पत्र में बताया गया कि आवेदन का एक बिंदु EOW भोपाल से संबंधित नहीं है। वहीं सहारा समूह के डायरेक्टरों एवं अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज अपराध वर्तमान में विवेचनााधीन हैं। इस कारण मांगी गई जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(h) के तहत प्रदान नहीं की जा सकती।

विभाग ने अपने जवाब में कहा कि ऐसी जानकारी का खुलासा जांच, गिरफ्तारी अथवा अभियोजन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए कानून में उपलब्ध अपवाद प्रावधानों के अंतर्गत सूचना देने से छूट प्राप्त है।

प्रथम अपील में उठाए सवाल

लोक सूचना अधिकारी के जवाब से असंतुष्ट होकर अधिवक्ता रमेश मिश्रा ने प्रथम अपील दायर की है। अपील में कहा गया है कि उन्होंने अपने पत्रों पर हुई कार्रवाई और विभागीय स्तर पर की गई प्रगति की जानकारी मांगी थी। केवल यह कहकर सूचना रोकी जाना कि मामला विवेचना में है, सूचना के अधिकार की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

अपील में यह भी उल्लेख किया गया है कि सहारा समूह के खिलाफ प्रदेशभर में हजारों निवेशकों की जमा पूंजी का मामला जुड़ा हुआ है और प्रभावित निवेशक लंबे समय से कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

धारा 8(1)(h) क्या कहती है?

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(h) के अनुसार ऐसी सूचना देने से इंकार किया जा सकता है, जिससे अपराधियों की जांच, गिरफ्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने की संभावना हो। हालांकि न्यायालयों और सूचना आयोगों के कई निर्णयों में यह भी कहा गया है कि संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना होता है कि सूचना देने से जांच किस प्रकार प्रभावित होगी।

निवेशकों में बढ़ी उत्सुकता

सहारा समूह से जुड़े मामलों में करोड़ों रुपये फंसे होने के कारण निवेशक लगातार कार्रवाई की जानकारी चाहते हैं। ऐसे में प्रथम अपील के निर्णय पर निवेशकों की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि अपीलीय अधिकारी सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश देते हैं तो मामले में नई जानकारी सामने आ सकती है।

प्रमुख बिंदु

🔹 सहारा समूह के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी मांगने के लिए RTI दायर की गई थी।

🔹 EOW भोपाल ने धारा 8(1)(h) का हवाला देकर सूचना देने से इंकार किया।

🔹 अधिवक्ता रमेश मिश्रा ने प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर की।

🔹 अपील में कार्रवाई संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

🔹 सहारा निवेशकों की नजर अब प्रथम अपील के निर्णय पर टिकी है।

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