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Shivpuri News : कागजी दावों की खुली पोल: स्वच्छ भारत मिशन के 'ODF' दावों के बीच रेलवे ट्रैक पर जिंदगी की जंग, शिवपुरी में युवक को ट्रेन ने रौंदा


शिवपुरी। सरकारें हर साल 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत देश को खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित करने का ढिंढोरा पीटती हैं, लेकिन शिवपुरी के रातौर गांव में हुआ दर्दनाक हादसा इन दावों की कड़वी हकीकत बयां कर रहा है। गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे, 35 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ राजाराम जाटव को रेलवे पटरी के किनारे शौच के लिए जाना पड़ा, जहाँ वह तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गए।

करोड़ों के बजट के बाद भी पटरी किनारे शौच की मजबूरी क्यों?

यह हादसा सिर्फ एक व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ भारत अभियान की जमीनी विफलता का जीता-जागता सबूत है। सवाल यह उठता है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग रेलवे पटरियों को शौचालय बनाने पर मजबूर क्यों हैं? क्या राजाराम के घर में शौचालय नहीं था? या फिर सरकारी कागजों में शौचालय बनकर तैयार हो चुका है और जमीन पर सिर्फ गड्ढा है? एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को सुरक्षा और सुविधा देने में यह सिस्टम पूरी तरह नाकाम रहा।

बिखर गया परिवार, बेसहारा हुए दो मासूम

जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे राजाराम की स्थिति अत्यंत नाजुक है। उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं और पत्नी पिछले दो महीने से छत्तीसगढ़ (मायके) में हैं। इस हादसे ने एक गरीब और लाचार परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। प्रशासन को अब यह जवाब देना होगा कि आखिर इन मासूमों की इस हालत का जिम्मेदार कौन है—वो तेज रफ्तार ट्रेन या वो सिस्टम जो आज तक इन गरीबों को एक सुरक्षित शौचालय नहीं दे पाया?


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