शिवपुरी (मध्य प्रदेश) घरेलू हिंसा और सामाजिक असंवेदनशीलता का एक और खौफनाक चेहरा शिवपुरी जिले के पोहरी क्षेत्र में सामने आया है। एक तरफ जहां देश में महिला सुरक्षा और 'बेटी बचाओ' के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं ग्राम दुलहारा के एक बेबस पिता अपनी पांच महीने की गर्भवती बेटी के लिए इंसाफ की भीख मांगते हुए एसपी दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक व्यवस्था और पुलिसिया मुस्तैदी पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
पहली शादी टूटी, दूसरी में मिला और भी गहरा जख्म
पीड़िता हल्की जाटव की जिंदगी में यह लगातार दूसरी बार हुआ है जब शादी जैसा पवित्र बंधन उसके लिए प्रताड़ना का सबब बन गया। तीन साल पहले ग्राम डौबा में हुई पहली शादी एक साल के भीतर ही टूट गई। समाज और परिवार ने सोचा कि ग्राम तीमानी के अवतार जाटव से दूसरी शादी करने के बाद उसकी जिंदगी संवर जाएगी। लेकिन, दूसरी शादी पहले से भी ज्यादा भयानक साबित हुई।
पीड़िता का आरोप: पति अवतार और जेठ शराब के नशे में धुत होकर उसके साथ बेरहमी से मारपीट करते हैं। हद तो तब हो गई जब गर्भावस्था के नाजुक दौर में, जहां एक महिला को सबसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है, उसे पीटकर घर से बाहर निकाल दिया गया।
व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती: क्या समय पर मिलेगा न्याय?
गुरुवार दोपहर को जब पीड़िता के पिता पित्थी जाटव एसपी कार्यालय पहुंचे, तो उनकी आंखों के आंसू व्यवस्था को झकझोरने के लिए काफी थे। अब गेंद पूरी तरह से पुलिस प्रशासन के पाले में है। इस मामले में कुछ गंभीर कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े होते हैं:
गर्भवती महिला की सुरक्षा: 5 महीने की गर्भवती महिला को इस तरह प्रताड़ित करना सीधे तौर पर दो जिंदगियों को खतरे में डालना है। क्या पुलिस आरोपियों पर 'घरेलू हिंसा अधिनियम' के तहत तत्काल सख्त कार्रवाई करेगी?
पुनर्वास और भरण-पोषण: पीड़िता को उसका हक और ससुराल में सुरक्षित सम्मानजनक स्थान दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
शराबखोरी और घरेलू हिंसा का कॉकटेल: ग्रामीण इलाकों में शराब के नशे में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं, जिस पर कड़े सामाजिक और कानूनी कदम उठाने की जरूरत है।
निष्कर्ष
पिता ने एसपी से गुहार लगाई है कि उनकी बेटी को उसका अधिकार दिलाया जाए और अमानवीय व्यवहार करने वाले ससुराल वालों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए। अब देखना यह है कि शिवपुरी पुलिस इस संवेदनशील मामले में कितनी तत्परता दिखाती है, ताकि एक पीड़ित बेटी का कानून पर भरोसा कायम रह सके।

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