गुरुवार के कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के एक बयान पर संसद में हंगामा खड़ा हो गया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के द्वारा बार-बार सदन की कार्यवाही रोक देने के बावजूद हंगामा शांत नहीं हुआ, आखिरकार उन्होने लोकसभा को अनिश्चित काल तक के लिये स्थगित कर दिया.हालांकि अचरज का विषय यह हो सकता है कि सत्तारुण दल की जिम्बेदारी बनती है कि सदन की कार्यवाही सुचारु रुप से चले मगर हंगामा करने वाला स्वयं सत्तारुण दल ही हो तो मामला ज्यादा गंभीर हो जाता है. राहुल गांधी के बयान से जहां केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा की महिला सांसद बहुत ज्यादा आहत हुईं तो वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह धेर्य खोते नजर आये. स्मृति ईरानी और महिला सांसद जहां राहुल गांधी को सदन के अध्यक्ष और आयुक्त चुनाव आयोग से दण्डित करने की मांग कर रहीं थी तो राजनाथ सिंह एक कदम आगे बढ़ते हुये गांधी से पूरे देश से माफी मांगने की मांग करते हुये कह रहे थे कि उनको इस सदन में रहने का नैतिक अधिकार नहीं है. दरअसल राहुल गांधी ने गुरुवार को झारखंड के गोड्डा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुये कहा कि नरेंद्र मोदी ने कहा था "मेक इन इंडिया" लेकिन इन दिनों जहां भी देखो वहां है "रेप इन इंडिया". गांधी ने यह भी कहा कि अखबार पढ़ो तो उसमें खबर होती है कि झारखंड में महिला के साथ रेप, उत्तर प्रदेश के उन्नाव में भारतीय जनता पार्टी के विधायक ने युवती के साथ रेप किया और युवती की गाड़ी में टक्कर देकर मारने की कोशिश की गई, मगर प्रधानमंत्री चुप हैं. उनके इस बयान पर अगले ही दिन शुक्रवार को स्मृति ने गांधी को आढ़े हाथों लेकर यह कहते हुये हमला बोला कि भारत के इतिहास में अब तक किसी नेता ने इतना घटिया बयान नहीं दिया. गांधी महिलाओं पर दुष्कर्म करने का आव्हान कर रहे हैं और प्रत्येक भारतीय पुरुष को दुष्कर्मी सिद्ध कर रहे हैं, उन्हें सजा मिलनी ही चाहिये.
राजनाथ सिंह,स्मृति ईरानी और भाजपा सांसदों के हंगामे से लगभग यह साबित हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चिंता जायज है जो समय-समय पर जाहिर कर चुके हैं कि मंत्री और सांसद घर से होमवर्क करके नहीं आते हैं. बाकई इस हंगामे से स्पष्ट है कि सांसद तो सांसद राजनाथ सिंह और स्मृति ईरानी जैसे वरिष्ठ मंत्री भी होमवर्क करके सदन में आने की बात को यदि छोड़ भी दें तो दिन पूर्व सदन में क्या हुआ? इसकी जानकारी नहीं रखते या फिर जान-बूझकर गांधी परिवार को निशाना बना रहे हैं? गत 10 दिसंबर मंगलवार को हैदराबाद और उन्नाव में दुष्कर्मियों द्वारा बेटियों को जलाकर मार देने के विषय में चल रहीं चर्चा मे जो राहुल ने झारखंड में बोला लगभग वही बात कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कही थी. चौधरी ने कहा था कि बीजेपी ने जिस भारत की पहचान "मेक इन इंडिया "से बताई थी वो भारत आज "रेप इन इंडिया "की ओर बढ़ता जा रहा है और प्रधानमंत्री जी जो हर मुद्दे पर बोलते हैं, चुप हैं. आखिर सवाल उठना लाजिमी है कि जो बयान राहुल गांधी का देश की महिलाओं पर दुष्कर्म के लिए आव्हान है और देश पर कलंक है तो अधीर रंजन चौधरी का लोकसभा में दिया गया बयान कैसे देश में घट रही बेटियों को दुष्कर्म के बाद जिंदा जला देने की घटनाओं की भर्त्सना और चिंता है? राजनाथ सिंह जी काफी वरिष्ठ और तजुरबेकार हैं और ईरानी को भी टीवी सिरियलों से राजनीति में आये डेढ़ दशक से ज्यादा हो गया है, यदि उसी दिन अधीर रंजन को डपट देते तो कल संसद का बहुमूल्य समय जाया नहीं होता. जबकि मंगलवार को जब चौधरी देश को "रेप इन इंडिया " बता रहे थे तो उस समय सदन में ग्रहमंत्री अमित शाह सहित व्हीप जारी करने के कारण भाजपा और एनडीए के लगभग सभी सदस्य मौजूद थे. इधर राहुल गांधी ने भी स्मृति ईरानी पर पलटवार करते हुये ट्वीटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी वीडियो जारी कर दी है. जिसमें मोदी यूपीए की सरकार लानत देते हुये कह रहे हैं कि आपने दिल्ली को रेपिस्टों की राजधानी बना दिया है, आप इस देश की मां-बैटियों की रक्षा और सुरक्षा नहीं कर सकते हैं. इसका ना आप में दम है और न कोई योजना. अब स्मृति को मंथन करना चाहिए कि अकेले राहुल और अधीर रंजन नहीं बल्कि और भी बहुत से नेता हैं जो अपने राजनीतिक फायदे के लिए समय-समय पर इस तरह के ओछे बयानों का सहारा लेते हैं. उन्हें देश को यह भी बताना चाहिए कि जब रंजन चौधरी सदन में वही बयान देते हैं जो गांधी झारखंड में देते हैं तो उनको गुस्सा क्यों नहीं आता है? मगर राहुल देते हैं तो गुस्सा क्यों आता है?

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