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अफसरों पर बढ़ा दबाब तो अटक गई फाइल,जानिए क्या है मामला


श्योपुर,
शहरी क्षेत्र के स्कूलों में अतिशेष बने शिक्षकों को गांवों के स्कूलों में भेजने के लिए शुरु हुई युक्तिकरण की कार्रवाई की फाइल फिर अटक गई है। जिसकारण गांवों के शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में शिक्षक पदस्थ होने की जगी उम्मीद फिर धूमिल पड़ गई है। इसके पीछे कारण विभागीय अफसरों पर बनाया गया दबाव बताया जा रहा है।
विभागीय सूत्र बता रहे है कि शहरी क्षेत्र के स्कूलों में जो शिक्षक अतिशेष के रूप में जुगाड़ से जमे हुए है,उन शिक्षकों ने युक्ति युक्तकरण की कार्रवाई के लिए चली फाइल को नेताओंं के जरिए अफसरों पर दबाव बनाकर रुकवा दिया है। जबकि युक्ति युक्तकरण की कार्रवाई संपादित करने के लिए शासन के द्वारा 23 नवंबर तक का समय निर्धारित किया गया था और शासन के निर्देश पर पड़ोसी जिले शिवपुरी में युक्ति युक्तकरण की कार्रवाई हो चुकी है।
शहर के स्कूलों में 50 शिक्षक अतिशेष
दरअसल शासन ने 15 से 23 नवंबर तक अतिशेष शिक्षकों का स्थानांतरण, शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में किए जाने की कार्रवाई पूरी करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के पालन में श्योपुर जिले में एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति ने श्योपुर शहरी क्षेत्र के स्कूलों में 50 शिक्षकों को अतिशेष शिक्षक के रूप में चयनित किया। यह शिक्षक लंबे समय से जरुरत नहीं होने के बाद भी शहर के स्कूल में पदस्थ बने है। समिति के प्रतिवेदन के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 50 अतिशेष शिक्षकों को गांवों के स्कूलों में भेजने की कार्रवाई की फाइल आगे बढ़ी।जो जिला पंचायत और कलेक्टर कार्यालय होते हुए अनुमोदन के लिए भोपाल चली गई। मगर इसके बाद फाइल अटक गई।
यह थे चार सदस्यीय समिति में
जिले के अतिशेष शिक्षकों को छांटने का काम करने वाली समिति में खंड शिक्षा अधिकारी श्योपुर केसी गोयल, मॉडल स्कूल प्राचार्य एके खंडेलवाल, प्राचार्य तुलसेफ सीताराम आदिवासी और रामकिशन गुप्ता शामिल थे।
60 स्कूलों में नहीं कोई शिक्षक पदस्थ
ज्ञात हो कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 60 मिडिल व प्रायमरी स्कूल ऐसे है,जिनमें एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों का संचालन करने के लिए आसपास के स्कूलों से शिक्षको की वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है। जबकि 160 स्कूल महज एक शिक्षक के भरोसे है। शहर से ज्यादा दूर होने के कारण कोई शिक्षक इन स्कूलों में जाने के लिए तैयार नहीं है। जिसकारण इन स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों का भविष्य खतरे है।
फैक्ट फाइल
50-शिक्षक अतिशेष के रूप में पदस्थ
60-स्कूलों में नहीं कोई शिक्षक पदस्थ
160-स्कूल एक शिक्षक के भरोसे
23-नवंबर तक पूरी करनी थी युक्तिकरण की कार्रवाई
04-सदस्यीय समिति ने ढूंढा अतिशेष शिक्षकों को
कैसे सुधरेगा इन स्कूलों का 5वीं,8वीं का परीक्षा परिणाम
केस-1
शामावि माखनाखेड़ली
श्योपुर तहसील के ग्राम माखनाखेड़ली स्थित शासकीय माध्यमिक स्कूल में 85 बच्चे पढ़ते है। लेकिन इस स्कूल में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है।
केस-2
शामावि श्रीपुरा
बड़ौदा तहसील क्षेत्र के ग्राम श्रीपुरा स्थित शासकीय माध्यमिक स्कूल भी शिक्षिक विहिन है। यहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। जबकि बच्चे 61 अध्ययनरत है।
वर्जन
युक्तिकरण की कार्रवाई की फाइल तैयार कर ली गई। जिसे शिक्षा मंत्री से अनुमोदन के लिए भोपाल भी भेजा था। मगर मंत्री महोदय से अनुमोदन नहीं हो पाया। ऐसे में अंतिम तिथि निकल गई। जिससे युक्तिकरण की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई।
वकील सिंह रावत
जिला शिक्षा अधिकारी,श्योपुर

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