| शिवपुरी | 12-दिसम्बर |
शिवपुरी जिले के ग्राम सतनवाड़ाकला निवासी श्रीमती रामकुंवर पत्नी श्री काशीराम आदिवासी एक ग्रामीण परिवार की महिला हैं। वह पढ़ी-लिखी भी नहीं है परंतु इतनी जागरूक हैं कि वह स्वयं आत्मनिर्भर होकर काम कर रही हैं साथ ही अन्य आदिवासी ग्रामीण महिलाओं को भी जागरूक बना रही हैं। रामकुवंर भले ही बुजुर्ग हैं परंतु उनके हौसले युवाओं से कम नहीं है इसी कारण वह गांव में होने वाली हर गतिविधि में सक्रिय रहती हैं। वह पशुपालन के साथ-साथ खेती भी करती हैं। रामकुंअर कहती हैं कि उन्होंने रीड बेड पद्धति से सोयाबीन की खेती की और इस पद्धति से वह अच्छा खासा मुनाफा प्राप्त कर रही हैं। शुरुआत में यह लगा की जमीन कम है और खेती से बहुत अधिक आमदनी नहीं ली जा सकती परंतु कोई विकल्प भी नहीं था। किसी कार्यक्रम के दौरान उन्हें किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के माध्यम से उन्नत खेती की तकनीकों के बारे में पता चला। उन्होंने भी इसे उपयोग करने का सोचा। उनका कहना है कि सोयाबीन की रिड बेड पद्धति से कृषि करने से उनके लिए खेती लाभ का धंधा बन गई है। उन्होंने बताया कि इसके लिए कृषि विभाग द्वारा बीज उपलब्ध करा दिए जाते हैं। इन्हीं उन्नत बीजो के उपयोग से और वर्ष भर की देखभाल से अब अच्छी फसल मिल रही है। |
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