
भोपाल। लोग ठोकर खाकर सीखते हैं। कोशिश करते हैं कि जिन परिस्थितियों ने जीवन में तनाव पैदा किया वैसी परिस्थितियां फिर से ना आए लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया शायद इस परंपरा के नेता नहीं है। सिंधिया एक बार फिर उसी ट्रैक पर चल पड़े हैं जिस पर 3 महीने पहले उन्होंने जिंदगी की सबसे बड़ी ठोकर खाई है। एक बड़ा प्रश्न यह भी है कि यदि इस बार ठोकर खाएंगे, तो कहां जाएंगे।

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