इंदौर, शहर के गायक 66 साल के अरुणकांत मिश्रा ने गुरुवार से कोरोना वायरस से लड़ने में सफलता हासिल की। करीब पांच साल पहले पैरालिसिस से पीड़ित अरुणकांत को कोरोना के लक्षण आने के बाद 11 दिन पहले सुपर स्पेशिएलिटी में भर्ती कराया गया था।
गायक महेंद्र कपूर और कवि प्रदीप के निधन पर चिता के सामने जाकर भजन गाकर चर्चाओं में आए अविवाहित अरुणकांत के किस्से भी कम नहीं है। उन्होंने दिल्ली, मुंबई, हरिद्वार में सत्संग में शामिल होकर भजन गाए हैं। मरीन ड्राइव मुंबई पर रोज सुबह भजन और गीत गाते थे। जो भी व्यक्ति पहली बार अरुणकांत की आवाज सुनता था, वह उनकी तारीफ किए बिना नहीं रहता था। उनकी आवाज से खुश होकर महाराष्ट्र के एक पूर्व मंत्री ने उन्हें रहने के लिए जगह उपलब्ध करवा दी थी। ने अपनी आवाज से अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अरुणकांत ने कहा कि आदमी में कला कभी मरती नहीं है, वह हमेशा जिंदा रहती है।
उन्होंने गाना भी सुनाया '' मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया।"" यही नहीं अरुणकांत ने कई कार्यक्रमों और विज्ञापनों में भी अपनी आवाज दी है। अपनी अगवानी से खुश अरुणकांत ने एक शायरी भी सुनाई 'हौसले बुलंद हो तो मिलते हैं रास्ते, यह दुनिया नहीं है बुझ दिलों के वास्ते""। उनकी इस शायरी से सांसद शंकर लालवानी का दिल जीत लिया। इसके बाद अरुणकांत अपने भाई शशिकांत मिश्रा के साथ बीमा नगर स्थित अपने घर चले गए। अरुणकांत के साथ दो अन्य संक्रमित मरीज भी स्वस्थ होकर घर लौटे।

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