इंदौर जो सैंपल कभी लिए ही नहीं उनकी रिपोर्ट कैसे जारी हो सकती है लेकिन स्वास्थ्य विभाग जारी कर रहा है। कोरोना की स्थिति नियंत्रण में दिखाने के चक्कर में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन आंकड़ों से खेल रहे हैं, लेकिन मेडिकल बुलेटिन खुद सचाई बयां कर रहा है। एक मई से 13 दिसंबर के बीच स्वास्थ्य विभाग ने शहर के अलग-अलग इलाकों से तीन लाख 94 हजार 701 सैंपल जमा किए लेकिन रिपोर्ट पांच लाख 70 हजार 117 सैंपलों की जारी हो रही है। सवाल यह है कि ये एक लाख 75 हजार 416 सैंपल आए कहां से जब इन्हें जमा ही नहीं किया गया।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर यह गंभीर आरोप सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने लगाया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोजाना जारी किए जाने वाले मेडिकल बुलेटिनों का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कोडवानी ने दावा किया कि सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में 44 प्रतिशत आंकड़े फर्जी हैं। एक मई से 13 दिसंबर तक 227 दिन में जारी मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक शहर में तीन लाख 94 हजार 701 सैंपल लिए गए, लेकिन इस अवधि में पांच लाख 70 हजार की रिपोर्ट जारी कर दी गई। ऐसे में सवाल यह है कि एक लाख 75 हजार सैंपल कहां से आए।
बगैर निगेटिव रिपोर्ट कैसे कर दिया डिस्चार्ज
कुछ समय पहले तक बगैर निगेटिव रिपोर्ट के किसी भी मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा था। अब तक शहर में 43 हजार 717 मरीज कोरोना से ठीक हो चुके हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि डिस्चार्ज किए गए मरीजों की दूसरी जांच कहां करवाई गई और इस जांच को रिपोर्ट में शामिल किया गया या नहीं।

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