इंदौर, कोरोना महामारी के कारण शहर के निजी और सरकारी होस्टलों को प्रचार-प्रसार के बाद भी विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं। लॉकडाउन में अपने घर जा चुके विद्यार्थी बहुत कम संख्या में शहर में रहने के लिए आ रहे हैं। इसके चलते होस्टल, फ्लैट और रूम का किराया कम हो गया है।
विद्यार्थियों को अब अपने बजट में रहने के लिए जगह मिल रही है। पहले तक जिस होस्टल के लिए प्रति विद्यार्थी चार से साढ़े चार हजार रुपये महीना देते थे अब वह तीन से साढ़े तीन हजार रुपये महीने में मिल रहे हैं। फ्लैट और रूम का किराया भी कम हुआ है। भंवरकुआं क्षेत्र में आठ से नौ हजार रुपये में मिलने वाले एक बीएचके के फ्लैट अब पांच से सात हजार रुपये में उपलब्ध हो रहे हैं। सिंगल रूम की बात करें तो ये विद्यार्थियों को ढाई से तीन हजार रुपये में महीनेभर के लिए मिल रहे हैं।
इंटरनेट मीडिया पर प्रचार करने के बाद भी विद्यार्थी नहीं मिल रहे
भंवरकुआं क्षेत्र के एक निजी होस्टल के संचालक शिव शर्मा का कहना है कि कोरोनाकाल में विद्यार्थियों ने स्थायी रूप से रूम छोड़ दिए हैं। इस दौरान विद्यार्थियों को उनका डिपॉजिट पैसा वापस देना पड़ा है। कई महीने से होस्टल खाली होने से मेंटेनेंस का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो रहा है। कम किराये में विद्यार्थियों को होस्टल ऑफर कर रहे हैं लेकिन बहुत कम विद्यार्थी ही अपने घर से शहर आ रहे हैं। होस्टल भरने के लिए इंटरनेट मीडिया पर भी प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। महेश्वर के रहने वाले विद्यार्थी रोशन पाटीदार का कहना है कि जब तक यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में नियमित कक्षाएं शुरू नहीं होती तब तक शहर आने की इच्छा नहीं है। कई अन्य विद्यार्थी और उनके माता-पिता भी यहीं कह रहे हैं कि कोरोना मामले कम होने के बाद ही किराये पर होस्टल लेंगे।

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