जबलपुर-भोपाल फोरलेन सड़क बनाने वाली मेसर्स बागड़ इंफ्रा प्रालि. की ओर से लकड़ी के बदले वन विभाग को करीब चार करोड़ रुपये अदा किए जाएंगे। उक्त लकड़ी सड़क के किनारे लगे दो हजार पेड़ों को काटने से निकली और कंपनी के सहजपुर स्थित प्लांट में रखी गई थी। गत 25-26 नवंबर की रात इस प्लांट में आग लगने से लकड़ी भी जलकर खाक हो गई।
फोरलेन सड़क बनाने वाली कंपनी के सहजपुर प्लांट में आग लगने की जांच शहपुरा पुलिस द्वारा की जा रही है। यह आग लगने का कारण अब तक अज्ञात है। कंपनी के मजदूरों ने 25-26 नवंबर की रात 3 बजे प्लांट में आग की लपटें उठते देखकर पुलिस कंट्रोल रूम को खबर दी। इसके बाद शहपुरा, भेड़ाघाट, पाटन और जबलपुर से फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गईं। करीब 4 घंटे बाद इस आग को काबू में किया जा सका। वहीं प्लांट में बड़ी आग की खबर पाकर मौके पर शहपुरा पुलिस, एसडीएम शहपुरा व मप्र सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के अधिकारी भी पहुंच गए। उक्त सभी ने कंपनी के प्लांट में रखी पेड़ों की लकड़ी जलकर खाक होना पाया। इसके बाद से कहा जा रहा है कि सड़क बनाने वाली कंपनी की ओर से शासकीय लकड़ी की कीमत खजाने में जमा की जाएगी।
लकड़ी की कीमत चार करोड़:
नागरिक बताते हैं कि सहजपुर प्लांट में जबलपुर-भोपाल एनएच-12 सड़क के दोनों किनारे से काटे गए करीब 2 हजार पेड़ों की इमरती व जलाऊ लकड़ी रखी थी। इसमें औसतन एक पेड़ की कीमत 20 हजार रुपये रही। इस हिसाब से सड़क बनाने वाली कंपनी को 4 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
वन विभाग को पता ही नहीं:
बागड़ इंफ्रा प्रालि. के सहजपुर प्लांट में आग लगने और पेड़ों की लकड़ी खाक होने की वन विभाग को खबर तक नहीं है। वनमंडल अधिकारी अंजना सुचिता तिर्की ने इस मामले में कहा है कि प्लांट में वन परिक्षेत्र अधिकारी शहपुरा को एक-दो दिन में भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी।
जबलपुर-भोपाल सड़क बनाने वाली कंपनी के सहजपुर प्लांट में आग लगने से वहां रखी लकड़ी और अन्य सामग्री जल गई है। कंपनी ने इस प्लांट का बीमा कराया था, इसलिए लकड़ी की कीमत बीमा कंपनी देगी।

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