शिवपुरी।
आज भी जब कहीं विवाद होता है तो लोग एक-दूसरे को कोर्ट में देख लेने की बात कहते हैं। यहां न्याय की उम्मीद सिर्फ कोर्ट से ही की जाती है। शिक्षा विभाग के बाबू वृंदावन शर्मा आत्महत्या मामले में भी ऐसा ही हुआ। जब मृतक के स्वजनों को पुलिस से न्याय नहीं मिला तो आखिर में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही आरोपित की गिरफ्तारी हुई। वृंदावन शर्मा आत्महत्या के मामले में आखिरकार तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार गुरुवार को जेल जाना पड़ा। गुरुवार को पूर्व डीईओ अजय कटियार ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत की याचिका खारिज होने और 7 दिन में सरेंडर करने के आदेश के बाद जिला कोर्ट में सरेंडर किया। यहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
अजय कटियार इस मामले में पिछले 6 महीनों से फरार चल रहे थे। मामला दर्ज होने के बाद वे जिला कोर्ट लेकर हाइकोर्ट तक अग्रिम जमानत के लिए गए। जब सभी जगह दरवाजे बंद हो गए तो अंत में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले शुक्रवार को जमानत की याचिका खारिज कर दी। इस मामले में आरोपित शिक्षा विभाग के ही तीन अन्य कर्मचारी सचिन अग्रवाल, प्रशांत गुप्ता और नरेंद्र सेंगर अभी भी फरार चल रहे हैं। सचिन अग्रवाल की चार बार हाइकोर्ट से अग्रिम जमानत की याचिका निरस्त हो चुकी है। वहीं प्रशांत गुप्ता ने भी अग्रिम जमानत की याचिका लगा रखी है।
हाइकोर्ट की अवमानना के एक मामले में तत्कालीन कलेक्टर अनुग्रहा पी. ने रीडर बसंत राव पवार को और अजय कटियार ने कानून संबंधी शाखा में बाबू वृंदावन शर्मा को निलंबित किया था। बसंत राव का निलंबन तो कुछ समय बाद निरस्त कर दिया गया था, लेकिन वृंदावन शर्मा को डीईओ अजय कटियार सहित सहायक ग्रेड 2 सचिन अग्रवाल, सहायक ग्रेड 3 प्रशांत गुप्ता और नरेंद्र सेंगर प्रताडित कर रहे थे। 6 महीने तक निलंबित रहने के बाद इनकी प्रताडना से तंग आकर वृंदावन शर्मा ने 29 जून को आत्महत्या कर ली थी।
एफआइआर दर्ज कराने भी देना पड़ा था धरना
इस आत्महत्या मामले में शुरुआत से ही देहात थाना पुलिस की भूमिका लापरवाही की रही। बड़े अधिकारी का नाम मामले में होने से पुलिस एफआइआर दर्ज करने में भी कतरा रही थी। 306 जैसा गंभीर अपराध होने और मृतक के पास से चार पेज का सुसाइड नोट मिलने के बाद भी पुलिस ने लापरवाही दिखाई। देहात थाने में जब इस मामले में एफआइआर दर्ज नहीं हुई तो वृंदावन शर्मा के स्वजनों को एसपी आफिस के बाहर धरने पर बैठना पड़ा था। इसके बाद जाकर कहीं 6 दिन बाद एफआइआर दर्ज हुई। एफआइआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। वृंदावन शर्मा ने स्वजनों ने भी पुलिस को कुछ सबूत सौंपे थे। पुलिस भोपाल से रिपोर्ट आने के हवाला देकर कटियार को गिरफ्तार करने से बचती रही थी।
इनका कहना है
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अजय कटियार को गिरफ्तार कर पेश किया है। न्यायालय से उसे जेल भेज दिया गया है।
- सुधीर सिंह कुशवाह, एसडीओपी।

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