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भाजपा ने रोके प्रशिक्षण वर्ग, अभी फोकस किसान कानूनों की समझाइश पर

 


भोपाल। ध्य प्रदेश में भाजपा ने मंडल स्तर पर चल रहे प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रमों को विराम दिया है। केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन को देखते हुए सोमवार से पार्टी 16 दिसंबर तक किसानों को कानून के बारे में जानकारी देने पर फोकस किया जाएगा। इसके लिए 15-16 दिसम्बर को प्रत्येक संभाग केंद्र पर किसान सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह सभी किसान सम्मेलनों और अन्य प्रचार माध्यमों के जरिये किसानों से सीधा संपर्क साधेंगे। उन्हें बताएंगे कि कानून किसानों के हित में हैं। विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को भी दूर किया जाएगा।

किसान आंदोलन का मप्र में भले ही कोई असर दिखाई नहीं दे रहा हो लेकिन भाजपा जगह-जगह किसान सम्मेलन आयोजित करने किसानों को विश्वास दिलाना चाहती है कि मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए जो नए कानून लायी है,वो किसानों के हित में हैं । पार्टी ने इसके लिए मंडल स्तर पर चल रहे प्राथमिक प्रशिक्षण वर्ग में भी दो दिन के लिए छूट दे दी है।

मंगलवार को भाजपा प्रदेश भर में किसानों को समझाने का काम करेगी। बुधवार को पार्टी ने प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालय में किसान सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इससे पहले सोमवार को भाजपा ने सभी जिला मुख्यालय में बड़े नेताओं की पत्रकारवार्ताएं आयोजित की हैं।

किसानों को अधिकार मिलना चाहिए या नहीं : विष्णुदत्त शर्मा

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा,ऐसे लोग किसान आंदोलन की तरफदारी कर रहे हैं, जो कर्जमाफी का झूठा वादा करके किसानों को धोखा देते हैं। भय और भ्रम फैलाकर अपना राजनीतिक एजेंडा चलाने वाले इन लोगों से मैं पूछना चाहता हूं कि देश के किसानों को अपनी उपज का दाम तय करने का अधिकार होना चाहिए या नहीं? उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार बाजार तलाशने का अधिकार होना चाहिए या नहीं? दलाली खत्म होना चाहिए या नहीं? मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या किसानों को चुंगी और टैक्स की चक्‍‍की में पिसने के लिए छोड़ देना चाहिए? मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों से अगर किसानों की तकलीफें कम हो रही हैं, तो इन्हें परेशानी क्यों हो रही है?

शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार के कृषि कानून आजादी के बाद किसानों की स्थिति में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का बड़ा प्रयास है। पहले किसानों को अपनी ही उपज पर निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं था, लेकिन इन कानूनों के लागू होने के बाद अब किसान स्वयं निर्णय लेता है।

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