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एक साल पहले हर माह बिकती थीं 1.29 कराेड़ सिगरेट, अब 19.5 लाख कम बिक रहीं

कोरोना महामारी का असर:एक साल पहले हर माह बिकती थीं 1.29 कराेड़ सिगरेट, अब 19.5 लाख कम बिक रहीं



धूम्रपान...यानी बीड़ी और सिगरेट का शाैक, लेकिन काेराेना संक्रमण के डर से अब यह शाैक घट रहा है। पिछले एक साल में बीड़ी की खपत में 25% और सिगरेट की बिक्री में 15% की कमी दर्ज की गई है। कारोबारियों के अनुसार मार्च 2020 (कोरोना महामारी से पहले) से पहले ग्वालियर जिले में हर महीने 19 करोड़ 20 लाख बीड़ी के बंडल और 1 करोड़ 29 लाख 90 हजार सिगरेट बिकतीं थीं, लेकिन अब बिक्री घटकर क्रमश: 12 करोड़ और 1 करोड़ 10 लाख 40 हजार रह गई है।

28% जीएसटी और 5-36% सेस लगने से भी घटी बिक्री


सिगरेट और बीड़ी पर 28% जीएसटी है। बीड़ी पर सेस नहीं है, लेकिन 83 एमएम तक की सिगरेट पर जीएसटी के अलावा 5 फीसदी, 84-100 एमएम तक की सिगरेट पर 36% सेस लगाया जा रहा है। इसके अलावा फिक्स्ड सेस में 64 एमएम प्रति हजार पर 2076, 69 एमएम प्रति हजार पर 2747, 84 एमएम प्रति हजार पर 4170 और 69 एमएम प्लेन पर 3668 रुपए लग रहे हैं।
बीड़ी बनाने वाली फैक्टरियां भी 14 से घटकर 10 रह गईं
ग्वालियर जिले में बीड़ी उद्योग में 14 फैक्टरी काम कर रही थीं, लेकिन काेरोना महामारी में बीड़ी की खपत में गिरावट से एक साल में बीड़ी बनाने वाली 4 फैक्टरी बंद होने की स्थिति में हैं। फिलहाल 10 फैक्टरी में ही बीड़ी बनाने का काम हो रहा है।
सिगरेट-बीड़ी की खपत घटने के 4 कारण
1.धूम्रपान, फेंफड़ों पर विपरीत प्रभाव डालता है। कोरोना से फेफड़े ही संक्रमित होते हैं। लोगों के बीच इसप्रकार की जागरूकता आने से सिगरेट-बीड़ी की खपत में गिरावट आई है।
2.सिगरेट की खपत में 30 फीसदी हिस्सेदारी छात्र वर्ग की है। स्कूल-कॉलेज बंद रहने से अधिकांश अपने-अपने घर पर हैं। जहां वे स्वच्छंदता से कस नहीं ले सकते।
3.कोराेना महामारी से पहले जो लोग अपने घरों में भी कस ले लिया करते थे। महामारी फैलने के बाद परिवार के लोगों के ऐतराज के बाद ऐस लोगों के कस पर पाबंदियां लगी हैं।
4.काेरोना काल में कई लोगों की नौकरियां चली गईं। उद्योग-धंधों पर भी प्रभाव पड़ा। लोगों की आमदनी में कमी से खर्च में भी कटौती होना भी इसका एक कारण रहा।
संक्रमण व ज्यादा टैक्स लगाने से घटी बिक्री


 कोरोना के कारण लोगों ने बीड़ी पीना कम किया




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