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आंकड़ों में वैक्सीन ज्यादा, डोज कम

 सरकारी आंकड़ों में 8.5 करोड़ डोज हर महीने बन रही, पर मई के 3 हफ्तों तक केवल 3.6 करोड़ दी गईं



देश में वैक्सीन का गणित उलझता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों में वैक्सीन की संख्या पर्याप्त बताई जा रही है, लेकिन इनका आवंटन काफी कम है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में बताया कि करीब 8.5 करोड़ वैक्सीन डोज हर महीने बनाई जा रही है, लेकिन मई के शुरुआती तीन हफ्तों में केवल 3.6 करोड़ वैक्सीन ही दी गई हैं।

इन सवालों के जवाबों से समझिए वैक्सीनेशन का गणित
1. अभी देश में वैक्सीन प्रोडक्शन के आंकड़े क्या हैं?

2. प्रोडक्शन के हिसाब से कितनी वैक्सीन मई में दी गई?

3. वैक्सीनेशन का गणित उलझा क्यों?
प्रोडक्शन के हिसाब के डोज दिए जाने का गणित उलझने की एक वजह समझ में आ रही है, वो है प्राइवेट सेक्टर्स का कोटा। इस सेक्टर को वैक्सीन डील न हो पाने की वजह से या फिर किसी अन्य वजह से नहीं मिल पाई हैं। हालांकि, ये कारण भी इतने बड़े गैप को एक्सप्लेन नहीं कर पा रहा है।

4. प्रोडक्शन के हिसाब से वैक्सीनेशन न होने का असर?
कर्नाटक ने रविवार को 18-44 तक के एजग्रुप का वैक्सीनेशन रोक दिया। 12 मई को महाराष्ट्र ने भी यही कदम उठाया था। 22 मई को आंध्र ने प्रधानमंत्री को खत लिखा कि प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन की सप्लाई रोक दी जाए। आंध्र ने कहा था कि अस्पताल मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। कोविन ऐप या पोर्टल पर भी वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट मिल नहीं रहे हैं।

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