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बिहार में ब्लैक फंगस महामारी घोषित

 

बिहार में ब्लैक फंगस महामारी घोषित:राज्य में अब तक 91 मरीज मिले, 4 सेंटर्स पर होगा इलाज; पटना AIIMS में 24 घंटे में 40 संदिग्ध मामले सामने आए

केंद्र सरकार के निर्देश के बाद अब बिहार सरकार ने भी ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है। राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश और तेलंगाना समेत ऐसा करने वाला बिहार 13वां राज्य बन गया है। एपिडेमिक डिजीज एक्ट-1897 के तहत इस बीमारी को महामारी घोषित करने का नोटिफिकेशन शनिवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग ने जारी कर दिया।

कोरोना पीड़ितों में यह बीमारी तेजी से पांव पसार रही है। बिहार में ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों की संख्या 91 पहुंच गई है।

बिहार में अब कैसे होगा इसका इलाज
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया है कि बिहार में ब्लैक फंगस के इलाज के लिए RMRI में दवाइयों का स्टोरेज किया गया है। पटना में AIIMS, IGIMS, PMCH और NMCH में इलाज की स्पेशल व्यवस्था की गई है। इनमें मरीजों को एंफोटेरिसिन की दवा फ्री में मिलेगी।

शनिवार को पटना AIIMS में आए 40 संदिग्ध, 7 में पुष्टि
बीते 24 घंटे में पटना AIIMS में 40 संदिग्ध मरीज आए, जिनमें से 7 में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। वहीं, शनिवार को ही IGMS में दो ब्लैक फंगस के मामले आए।

मरीजों का डेटा सरकार को भेजेंगे अस्पताल, नहीं तो होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि महामारी घोषित होने के बाद सरकार को ब्लैक फंगस के हर मामले, मौतों और दवा का हिसाब रखना होगा। कोरोना महामारी की तरह ही अस्पतालों को मरीजों का डेटा सरकार को भेजना होगा। ऐसा नहीं करने वाले अस्पतालों पर महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार पटना AIIMS और IGIMS को ब्लैक फंगस के इलाज के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित कर चुकी है। दोनों ही जगहों पर विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है।

क्या है ब्लैक फंगस?
ये एक फंगल डिजीज है। जो म्यूकॉरमाइटिसीस नाम के फंगाइल से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों जो बॉडी की इम्युनिटी को कम करती हों या शरीर की दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों। ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।

फंगस कहां पाया जाता है?
ये बहुत गंभीर, लेकिन एक रेयर इंफेक्शन है। ये फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है, खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में। जैसे- पत्तियों, सड़ी लकड़ियों और कम्पोस्ट खाद में ब्लैक फंगस पाया जाता है।

ये शरीर में कैसे पहुंचता है और इससे क्या असर पड़ सकता है?
वातावरण में मौजूद फंगस ज्यादातर सांस के जरिए हमारे शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैल सकता है। अगर इसे शुरुआती दौर में ही डिटेक्ट नहीं किया जाता तो आंखों की रोशनी जा सकती है। या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगस फैला है शरीर का वो हिस्सा सड़ सकता है।

इसके लक्षण क्या हैं?
शरीर के किस हिस्से में इंफेक्शन है उस पर इस बीमारी के लक्षण निर्भर करते हैं। चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना जो बहुत ही तेजी से गंभीर हो जाते हैं।

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