शिवपुरी कोरोना काल में जिस कोविड आईसीयू में भर्ती होने के लिए मंत्री और बड़े अधिकारियों की सिफारिश के बाद भी पलंग नहीं मिल पाता था वहां अब सारे पलंग खाली हैं। पूरे 112 दिन बाद जिला चिकित्सालय कि इस गहन चिकित्सा इकाई में एक भी मरीज भर्ती नहीं है। संयोग देखिए कि 1 जून डॉक्टर्स डे के अवसर पर चिकित्सकों को भी इससे बड़ी राहत मिली है।
जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ राजकुमार ऋषिश्वर की माने तो तकरीबन 4 महीने में यह अवसर आया है। जब एक भी मरीज कोरोना से ग्रसित होकर जिला चिकित्सालय में उपचार न ले रहा हो ।हालात यह थे कि जब 20 मार्च के बाद कोरोना के केस लगातार बढ़ने शुरू हुए और भर्ती होने वालों मरीजों की संख्या अप्रैल तक 100 से अधिक पहुंच गई तब हालात यह थे कि आईसीयू वार्ड में भर्ती होने के लिए दिल्ली, भोपाल से मंत्रियों तक के फोन आते थे, उपलब्धता होने पर हम बेड ईशु भी कर देते थे। लेकिन कभी-कभी हालात ऐसे होते थे कि उनकी सिफारिश के बाद भी हम मरीज को पलंग नहीं दे पाते थे। तब उन्हें हम जिला चिकित्सालय से मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर करते थे।
कुल मिलाकर हालात यह हैं कि 1 सैकड़ा से अधिक मरीजों को लगातार उपचार प्रतिदिन जिला चिकित्सालय में मिला और इतने ही मरीज अगले दिन भर्ती के लिए फिर आ जाते थे। बहुत कठिन समय था वह, ऐसे समय में किसी की मृत्यु हो जाने पर तो और कष्ट होता था। आज हालात इसके उलट है। प्रशासनिक पहल और लोगों की जागरूकता की वजह से कोरोना संक्रमण घटा है और अब एक भी मरीज जिला चिकित्सालय में आज भर्ती नहीं है। यह बहुत लंबे समय बाद ऐसा सुखद अवसर आया है, जब कोरोना का एक भी मरीज नहीं है।
हमें सावधानी बरतने की आवश्यकता है
20 मार्च से अब तक तकरीबन 4 हज़ार मरीज भर्ती हुए। जिनका उपचार हुआ है, 1 जून को जिला चिकित्सालय में कोरोना का कोई भी भर्ती मरीज नहीं था। यह सुखद बात है। लेकिन हमें अभी भी सावधानी बरतने की बहुत आवश्यकता है। -डॉ. एएल शर्मा, सीएमएचओ, जिला चिकित्सालय शिवपुरी
अब तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों में जुटा अमला
सिविल सर्जन डॉक्टर राजकुमार ऋषिस्वर ने बताया कि अब जिला चिकित्सालय का पूरा अमला आने वाली तीसरी लहर के मुकाबले की तैयारी में जुटी हुई है। चिल्ड्रन वार्ड भी अलग से बनाए हैं, और जो अभी कोरोना के मरीजों को वार्ड पहले से निर्धारित थे वह भी पूरी तरह से तैयार कर रहे हैं,ताकि भविष्य में यदि लहर आई तो उसका मुकाबला किया जा सके। हालांकि वैक्सीनेशन प्रक्रिया तेजी से होने के चलते कोरोना संक्रमण अब इतनी तेजी से फेलेगा ऐसी आशंकाएं विशेषज्ञ कम व्यक्त कर रहे हैं। कुल मिलाकर पूरे 4 महीने बाद अब कोरोना के मरीजों का शून्य जिला चिकित्सालय में लगा है।

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