जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शिवपुरी की सीईओ ने राशि का अंतर खत्म करने भोपाल पत्र लिखा है
- इसमें कोलारस शाखा में 7 करोड़ गबन का मामला भी शामिल
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (सीसीबी) शिवपुरी में किसान क्रेडिट कार्ड के रिकार्ड में 100 करोड़ रुपए से अधिक का अंतर आने की वजह से सोशल मीडिया पर घोटाले की अफवाह फैल गई। रविवार को इससे किसानों में हड़कंप का माहौल है। हालात यह बने कि किसान सीसीबी की शाखाओं के कर्मचारियों के घर पहुंचकर खाते में जमा पैसा मांग रहे हैं। दरअसल अपेक्स बैंक को भेजी जाने वाली मांग में सीसीबी शिवपुरी द्वारा पांच-छह सालों से ब्याज व कनवर्सन की राशि नहीं जोड़ी गई। इस कारण अंतर की राशि हर साल बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार सीसीबी शिवपुरी की सीईओ लता कृष्णन ने 31 जुलाई को आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं भोपाल को पत्र लिखा है कि सीबीएस सिस्टम से प्राप्त ऋण वितरण के आंकड़ों का सही मिलान नहीं हो पा रहा है। बैंक स्तर पर लेखा कक्ष से जानकारी निकाली तो कुल मांग राशि 184 करोड़ रु. है। जबकि सीबीएस सिस्टम के आधार पर प्राप्त प्रतिवेदन अनुसार कुल मांग राशि 287 करोड़ रुपए पाई गई है।
इस तरह 100 करोड़ से भी अधिक का अंतर पाया गया है। इस मामले की जांच कराने के लिए आयुक्त नरेश पाल कुमार ने प्रदेश स्तरीय 13 सदस्यीय जांच दल गठित किया है। यह दल सोमवार को शिवपुरी जांच करने आ रहा है। बता दें कि बकायादार किसानों से केसीसी दो से पांच साल में किस्तों में कनवर्सन राशि जमा कराई है। अपेक्स बैंक से ऋण की मांग में ब्याज व कनवर्सन राशि को उल्लेख नहीं होने से साल दर साल अंतर की राशि बढ़ रही है।
अपेक्स का मत 48.04 करोड़ सीसीबी से लेना शेष हैं, इसलिए जांच दल गठित
मप्र राज्य सहकारी बैंक ने 2 अगस्त को पत्र के जरिए अवगत कराया है कि सीसीबी शिवपुरी से अपेक्स को विभिन्न मदों में 48.04 करोड़ रुपए लेना शेष है। प्रकरण में वित्तदायी बैंक अपेक्स बैंक ने मप्र सहकारी सोसाईटी अधिनियम की धारा 59 के प्रावधानों के तहत जांच कराने का अनुरोध किया है। इसलिए जांच दल का गठन किया है।
कोलारस में कैशियर व कंप्यूटर ऑपरेटर ने 7 करोड़ का गबन किया
सीसीबी की कोलारस शाखा में कैशियर राकेश पाराशर एवं कंप्यूटर ऑपरेटर ने मिलीभगत कर कतिपय खातों में राशियां अनियमित डेबिट कराईं हैं। इसमें स्वयं, अपने परिजन, परिचितों के अन्य बैंक खातों में राशि एनईएफटी कराई हैं। इस गबन के बाद 2 करोड़ रु. 31 जुलाई को जमा भी करा लिए हैं।
बैंक ने इस तरह की अनियमितताएं कई सालों से जारी होने की आशंका जताई है। कैशियर मामले में निलंबित है। बैंक मैनेजर भी डिजीटल सिग्नेचर के गलत इस्तेमाल के चलते निलंबित है। इस गबन मामले की भी जांच दल द्वारा की जाना है।
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