मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर अपने निवास पर मंगलवार देर शाम बैठक की। इसमें पिछड़ा वर्ग से जुड़े 15 संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया, सरकार इस मामले को पूरी ताकत के साथ न सिर्फ न्यायालय में लड़ेगी, बल्कि पिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए उनकी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन कराएगी। इसके लिए अलग से आयोग बनाया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ पिछड़ा वर्ग से लोगों से ही फीडबैक लेकर अनुशंसाएं करेंगे, जिसके आधार पर सरकार योजनाएं बनाएगी।
पिछड़ा वर्ग को कांग्रेस द्वारा किए गए छल की जानकारी देने के लिए मंत्री, सांसद, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधि संवाद भी करेंगे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को पिछड़ा वर्ग से जुड़े 15 से ज्यादा संगठनों के प्रतिनिधियों से आरक्षण की स्थिति को लेकर चर्चा की और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस ने OBC आरक्षण का मुद्दा उठाने के बाद 12 अगस्त को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया था कि हाईकोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील तुषार मेहता को बुलाएंगे। 1 सितंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से प्रकरण की अंतिम सुनवाई कर फैसला करने का आवेदन दिया जाएगा।
दिल्ली में वरिष्ठ वकीलों से मुलाकात
इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली दौरे पर थे। उन्होंने वरिष्ठ वकील तुषार मेहता समेत कुछ और वकीलों से मुलाकात की थी। शिवराज सिंह के साथ मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव भी थे। वकीलों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाईकोर्ट में आरक्षण के मुद्दे पर होने वाली अगली सुनवाई के संबंध में चर्चा की।
क्या है मामला?
2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण देने का विधेयक लेकर आई थी, लेकिन फैसले पर तत्काल ही हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया था। इसके बाद प्रदेश में ओबीसी को 14% आरक्षण ही दिया जा रहा है। हाल में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ओबीसी को 27% आरक्षण ना मिल पाने के लिए मौजूदा शिवराज सरकार को घेरा था।
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकार आरक्षण पर कोर्ट में ठीक तरह से पक्ष नहीं रख रही। इसी का काउंटर करने के लिए बीजेपी एक्टिव हुई। अब बीजेपी की ओर से ये आरोप लगाया जा रहा है, कांग्रेस आरक्षण का विधेयक सिर्फ वोट बैंक के लिए लेकर आई थी। खुद सीएम शिवराज ने मंगलवार को कहा था, कमलनाथ सरकार ने कोर्ट में समय पर जवाब पेश नहीं किया था, इसलिए उस पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया था।
हाईकोर्ट 1 सितंबर को करेगा सुनवाई
बता दें, मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने OBC वर्ग को 27% आरक्षण देने के मामले को लेकर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण के संबंध में सरकार के आदेश पर रोक बरकरार रखी है। 1 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी।

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