जिन छात्र-छात्राओं के माता-पिता या परिजन को कोरोना संक्रमण हुआ और इस दौरान वह होम क्वारेंटीन होने की वजह से न तो परीक्षा फार्म भर सके थे और न ही वह परीक्षा दे सके थे। इससे उनके साल खराब होने का खतरा उत्पन्न हो गया था। जीवाजी विश्व विद्यालय प्रबंधन ने अब ऐसे छात्र जो कोरोना या किसी भी अन्य वजह से परीक्षा से वंचित रह गए उन छात्र-छात्राओं को परीक्षा देने का नया अवसर दिया है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नए सिरे से महाविद्यालय प्रबंधन को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
श्रीमंत माधवराव सिंधिया शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर महेंद्र कुमार की मानें तो इस बार के परीक्षा कार्यक्रम के दौरान कोरोना संक्रमण का दौर था, जिसमें विश्वविद्यालय प्रबंधन ने घर से ही कॉपियां लिखकर लाने के सिस्टम यानि ओपन बुक सिस्टम के आधार ही परीक्षा आयोजित की थी। जिसमें छात्रों को ऑनलाइन पेपर उपलब्ध कराया गया और फिर 2 दिन का समय कॉपियों में लिखने का दिया इसलिए उन्हें उत्तर पुस्तिका में देखकर लिखकर लाने का मौका मिला।
महाविद्यालय के 10 से 20 फीसदी छात्र ऐसे रहे जिन्होंने किसी वजह से परीक्षा फार्म नहीं भरा या किसी ने परीक्षा फार्म भरा तो परीक्षा की कॉपियां जमा कराने वह महाविद्यालय में नहीं पहुंचे। इससे उनके पूरे एक सत्र का नुकसान हो जाता। छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से मांग भी की थी कि ऐसे विद्यार्थियों को परीक्षा में सम्मिलित होने का एक अवसर और मिले। बस इसीलिए महाविद्यालय प्रबंधन ने नया परीक्षा कार्यक्रम जारी किया है।
फीस तो जमा हो गई, लेकिन परीक्षा दिलाने से महाविद्यालय प्रबंधन ने हाथ खड़े किए
बीकॉम द्वितीय सेमेस्टर के छात्र अनुभव पुत्र दिनेश जैन गंज वालों ने प्रवेश प्रक्रिया तो पूरी कर ली लेकिन उनके पिता को कोरोना हो जाने की वजह से वह परीक्षा फार्म नहीं भर सके। लास्ट डेट कब निकली वह यह भी पता नहीं कर सके क्योंकि होम क्वारेंटीन थे। इसके बाद उन्होंने जब प्राचार्य महेंद्र कुमार से कहा कि वह कॉपियां जमा कर ले,ं लेकिन उन्होंने कॉपियां जमा करने से इंकार कर दिया। छात्र ने ग्वालियर जाकर जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन को इसकी शिकायत की और इसके बाद प्रबंधन ने ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए एक और मौका परीक्षा का दिया है।
- बीए की तृतीय वर्ष की छात्रा कामिनी की फीस तो जमा थी, लेकिन उसके मामाजी पुरुषोत्तम को कोरोना हो गया जिस वजह से वह कॉलेज नहीं आ सकती थी। होम क्वारेंटीन होने की वजह से वह भी परीक्षा नहीं दे सकी थी। उसने बाद में प्राचार्य से कॉपियां जमा करने की मिन्नत की, लेकिन तारीख निकल जाने की वजह से उन्होंने असमर्थता जता दी। नया परीक्षा कार्यक्रम आने से छात्रा का एक साल खराब होने से बच गया।
यूजी और पीजी के यह छात्र-छात्रा हो सकते हैं शामिल
ओपन बुक परीक्षा के इस विशेष अवसर में वह परीक्षार्थी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने महाविद्यालय में प्रवेश तो लिया पर परीक्षा फार्म नहीं भर सके या फिर परीक्षा देने नहीं आए। उन छात्र-छात्राओं के लिए यह द्वितीय अवसर दिया गया है, जिसमें बीए, बीकॉम, बीएससी प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष, बी लिब, एलएलबी सेकंड, फोर्थ और सिक्स सेम, एमए, एम कॉम, एमएससी द्वितीय सेमेस्टर, भूतपूर्व और नियमित एटीकेटी छात्र, ऐसे छात्र जो ओपन बुक परीक्षा में किसी वजह से सम्मिलित नहीं हो सके वह शामिल हो सकेंगे।
यह जारी हुआ कार्यक्रम
- परीक्षा आवेदन पत्र भरने की दिनांक- 20 अगस्त
- विश्वविद्यालय में भेजने की दिनांक- 23 अगस्त
तो प्राचार्य होंगे जवाबदार
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने यह भी चेतावनी महाविद्यालय प्रबंधन को जारी की है जिसमें परीक्षा आवेदन ऑनलाइन होने के पश्चात तत्काल छात्रों के आंतरिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अवश्य जारी करने के निर्देश दिए है। आंतरिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन न होने की स्थिति में छात्र का प्रवेश पत्र ऑनलाइन अपडेट नहीं किया जाएगा। जिसकी जवाबदारी महाविद्यालय प्राचार्य की होगी। इस वजह से महाविद्यालय प्रबंधन भी अब छात्रों के साथ प्रोफेसर को नियमावली का अवलोकन करा पूरी कार्रवाई करने के निर्देश दे रहे हैं।
छात्र साल बचा सकते हैं
यूजी और पीजी के मिलाकर कुल 200 के करीब विद्यार्थी होंगे जो परीक्षा देने से वंचित किन्ही कारणों से रह गए। ऐसे विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय प्रबंधन ने टाइम टेबल जारी किया है। जिसका लाभ लेकर वह अपना यह साल बचा सकते हैं। -प्रोफेसर महेंद्र कुमार, प्राचार्य, श्रीमंत माधवराव सिंधिया शासकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय

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