Music

BRACKING

Loading...

याचिका : MP हाईकोर्ट में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू कराने के लिए , अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा


 

MP हाईकोर्ट में जनवरी 2000 में प्रदेश में लाई गई जनसंख्या नीति को लागू कराने जनहित याचिका लगाई गई है। इस पर 8 सितंबर को सुनवाई होगी। इसी के साथ MP में भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस-बीजेपी इस मुद्दे पर आमने-सामने है। दरअसल, 2000 में जब ये नीति लाई गई थी, तब प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे।

नागरिक उपभोक्ता मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे ने 28 जुलाई को अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा के माध्यम से MP हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है। याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट को अवगत कराया गया है कि प्रदेश में जनवरी 2000 में जनसंख्या नीति लाई गई थी, लेकिन उसे पूर्णत: लागू नहीं किया गया। याचिका के माध्यम से उन्होंने इस नीति की समीक्षा और विश्लेषण करने की मांग की है, जिससे नीति की कमजोरियां सामने आ सके और भविष्य के लक्ष्य प्राप्त करने में आसानी हो। इस नीति का पालन करने के लिए निष्क्रिय पड़ी समितियों को भी पुनर्जीवित करने की मांग की है।

राष्ट्रीय औसत से अधिक है जनसंख्या वृद्धि दर
याचिका में बताया गया है कि MP में जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। पिछले 10 वर्षों में यह 20% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 17% है। प्रदेश में जनवरी 2000 में जनसंख्या नीति लागू की गई थी, लेकिन पिछले 21 वर्षों में इस नीति की न तो समीक्षा की गई और न ही विश्लेषण किया गया। इस नीति को पूर्णत: कभी लागू भी नहीं किया गया।

फर्टिलिटी रेट घटाने का नहीं हुआ प्रयास
इस नीति में तय किया गया था, कुल फर्टिलिटी रेट 2.1 होना चाहिए। इससे प्रतिवर्ष बढ़ने वाली जनसंख्या 1.1 मिलियन प्रतिवर्ष से 1 मिलियन तक घट जाए। यह नीति कागजों से आगे अमल में नहीं लाया जा सका। इस नीति को लागू करने राज्य स्तर पर दो उच्चस्तरीय कमेटियां और जिला स्तर पर भी कमेटियां बनी, लेकिन यह कमेटियां निष्क्रिय पड़ी हैं। जनसंख्या में भारी वृद्धि से स्रोत घट रहे हैं।

जनसंख्या नीति को लेकर सियासत भी शुरू
जनसंख्या नीति को लेकर बीजेपी-कांग्रेस में सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस विधायक एवं पूर्व वित्ती मंत्री तरुण भनोत के मुताबिक हमारी सरकार यह नीति लेकर आई थी, पर प्रदेश में 2003 से 15 महीने छोड़कर बीजेपी की ही सरकार रही। मगर जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण होना ही चाहिए। प्राकृतिक स्रोत और संसाधन घट रहे हैं।

वहीं, बीजेपी विधायक सुशील तिवारी ने कहा कि कांग्रेस की जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कोई स्पष्ट नीति रही ही नहीं। बीजेपी ने जनसंख्या नियंत्रण कानून आम लोगों के समक्ष रखा तो कांग्रेस इसका विरोध करते हुए अपनी कथनी और करनी दर्शा चुकी है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ