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जयकारा के साथ नवान्ह श्री रामचरितमानस यज्ञ एवं रामकथा प्रवचन हवन,सहस्त्रधारा(गंगा स्नान) के साथ समापन

 


बिर्रा- हनुमान मंदिर प्रांगण भाटापारा बिर्रा में अपने गुरू ब्रह्मलीन पं त्रियुगी कुमार दुबे जी के पावन स्मृति में मोहनलाल कश्यप परिवार द्वारा आयोजित नवान्ह श्रीरामचरितमानस यज्ञ अखंड नवधा रामायण का समापन आचार्य द्वय पं.उमेश कुमार दुबे व जितेन्द्र तिवारी के द्वारा यज्ञ-हवन-पूर्णाहूति-सहस्त्रधारा

गंगा स्नान के साथ निर्विध्न सम्पन्न हुआ।आयोजक परिवार द्वारा ग्राम व आस-पास से मानस गायन करने गायक,वादक और प्रवचनकर्ता को शाल, श्रीफल, सुंदरकांड की प्रति भेंट कर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर प्रबुद्ध भारती के मार्गदर्शक सेवानिवृत्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी एम आर

कुंभकार जी ने कहा कि यह मां चंडी दाई का बहुत ही पवित्र पावन क्षेत्र है जहां बहुत ही सुन्दर अपने ब्रम्हलीन गुरु पंडित

त्रियुगी कुमार दुबे जी की पावन स्मृति में आयोजित नवान्ह रामचरितमानस यज्ञ एवं रामकथा किया गया। जिसमें मुझे काफी प्रसन्नता हुई कि यहां के जो जनता है यहां के जो रामायण प्रेमी हैं बड़े लगन तन मन सेवा भाव के साथ रामचरितमानस का गायन करके हमें कृत कृत किया हम वैसे रामायण के प्रेमी भी है हम पहले प्रवचन करते थे लेकिन हमने प्रवचन छोड़ दी क्योंकि कई जगह ऐसी स्थिति आयी कि मुर्खताओं कि हमें झलक दिखलाई दी लेकिन ग्राम बिर्रा में मां चंडी दाई की पवित्र भूमि पर यहां जो रामचरितमानस व रामकथा गुणगान, सुनने नौ दिन मिला कैसे गुजरा पता ही नहीं चला सबके सब आनंद के साथ रामचरितमानस का अमृतपान किए साथ ही परमपूज्य युगतुलसी पद्मभूषण श्री रामकिंकर जी महराज के परम सानिध्य शिष्य पंडित नरेन्द्र शुक्ला जी का रामकथा प्रवचन सुनके ऐसा लगता था कि आंसूओं की धारा बह रही है हम तो बहुत ही गदगद थे कोरोना काल के बाद ऐसा रामकथा सुनने को मिला।बस मैं आप सभी को यही कहूंगा कि सारे काम छोडके जहां भगवान की कथा गुणगान हो रही हो जरूर पहुंचे क्योंकि जिंदगी का ठीकाना नहीं कब छोडके चला जाए इसलिए रामभक्ति ही मात्र एक साधन है।वास्तव में श्रीरामचरितमानस के पठन-श्रवण से जीवन सुधर जाती है।और यह आयोजन शिष्य ने अपने  ब्रम्हलीन गुरु के लिए आयोजित कर अपने आप में प्रशंसनीय रहा।इस बीच पांच दिवसीय प्रवचन श्रीधाम अयोध्या से पधारे युग तुलसी श्री राम किंकर जी महाराज के सानिध्य प्राप्त शिष्य नरेन्द्र शुक्ला जी के मुखारविंद से कथा का विस्तार से वर्णन किया गया। आयोजन को लेकर प्रबुद्ध भारती संयोजक पं गिरजा कुमार दुबे,मनोज कुमार तिवारी,हरिराम जायसवाल, मुख्य यजमान श्रीमती सुषमा

कश्यप-मोहनलाल कश्यप,महाराम कश्यप,रोहनलाल कश्यप अभिराम कश्यप, दामोदर दास वैष्णव, शत्रुघन कश्यप, उमाशंकर कश्यप, चंवरसिंह कश्यप, गणेशराम कश्यप, गोपाल कश्यप,भीम कश्यप,फागुलाल साहू,सौखीलाल पटेल,आत्माराम,धनसाय कश्यप,दूजराम कश्यप,बहोरन धीवर,धनेश, दिनेश कश्यप,श्रवणकुमार कश्यप,दाऊसाहब,रमेश साहू, डॉ हेमंत कश्यप,डां शशि कश्यप, रविन्द्र जैन,श्रीमती छाया जैन,प्रांजली कश्यप,कामना कश्यप यशदीप कश्यप, परदेशी केंवट,कैलास महापात्र महावीर धीवर सहित परिवार के सदस्य व ग्रामवासी उपस्थित थे। 



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