By -- श्रीगोपाल गुप्ता।
चम्बल क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और डकैतों के आंतक के साये में गरीबी के दलदल में फंसे स्थानीय किसानों को उभारने के लिये सन् 1970 में दी मुरैना मंडल सहकारी कारखाना मर्यादित कैलारस-जिला मुरैना बनकर तैयार हुआ और सन् 1972 में इसमें अच्छी क्वालिटी की शक्कर पहली बार बनकर तैयार हुई! जिसकी धूम प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों भी सुनाई देने लगी और अच्छे मुनाफा की आस में चम्बल के किसानों ने डकैतों के दमन के डर को एक किनारे रख क्षेत्र की व अपनी उन्नति के लिये पूरी ईमानदारी के साथ गन्ना उगाने में रम गये! फिर क्या था देखते-देखते कैलारस,जौरा,सबलगढ़ सहित पूरा मुरैना जिला समृद्ध की राह पर आ खड़ा हुआ! 1200 से अधिकारी कर्मचारी और हजारों गन्ना उत्पादक किसान के जुड़ने से तब जिले के एकमात्र औधोगिक कारखाने कैलारस शक्कर कारखाना ने पहली दफा चम्बल में उधोगों की संभावनाओं को बल दिया कि चम्बल में भी डकैतों के भारी आंतक और दहशत के बावजूद कारखाने लगाकर समृद्धि के दरवाजे खोले जा सकते हैं! मगर सन् 2010 में भारतीय जनता पार्टी के शासन में ही कारखाना अफसरशाही व भ्रष्टाचार का शिकार होकर बंद पड़ा हुआ है! तब से बंद पड़ा कारखाना का मुद्दा दोनों राजनीतिक दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के लिये फुटवाॅल बना हुआ है! जिससे दोनों दल बिना किसी शर्म और लिहाज के बेहयाई के साथ प्रत्येक चुनाव में कैलारस- कैलारस कारखाना खेल रही हैं और बंद पड़े कारखाने से बैरोजगार हुये हजारों कर्मचारी और अपनी रोजी-रोटी छिन जाने के कारण भारी कर्जे के बोझ तले दबे किसानों की भावनाओं के साथ खिलबाड़ कर रही हैं!सन् 2016-17 में अचानक भाजपा की शिवराज सरकार द्वारा कारखाने के सहकारिता चुनाव कराने से क्षेत्रिय किसान,कर्मचारी और शक्कर व्यापारीयों को पूरी उम्मीद जगी कि शक्कर कारखाना अब खुल जायेगा !
सन् 2018 में प्रदेश विधानसभा चुनाव में जौरा में खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने जनता को पूरजोर तरीके से क्षेत्र की जनता ने एक चुनावी आमसभा में विश्वास दिलाया कि जौरा से भाजपा को जिताओ मैं कारखाना खुलवाऊंगा! मगर जनता ने 2020 में हुये उप चुनाव में तो भाजपा के प्रत्याशी को जिता दिया मगर 2018 में मुख्यमंत्री को अनसुना करते हुये वर्षों से अपनी सरकार बनने पर कारखाने को पुनः खोलने का राग अलाप रही कांग्रेस पर अपार विश्वास करते हुये न केवल जौरा विधानसभा बल्कि इतिहास में दूसरी मर्तबा सन् 2018 में पूरे मुरैना जिले की छह सीट कांग्रेस की झोली में डाल दी!चूंकि कांग्रेस के बड़े नेता सन् 2013 और सन् 2018 के विधान सभा चुनाव में क्षेत्र की जनता से वादे कर चुके थे कि सरकार बनते ही 100 दिन में कैलारस शक्कर कारखाने को हर कीमत पर चालू कर दिया जायेगा! मगर वादा खिलाफी भी इतनी तगड़ी की 100 दिनों में कारखाना तो चालू नहीं करा सके लेकिन सत्ता में आते ही इसे बंद करने का काम शुरु कर दिया!इसे समाप्त करने और बाइंड अप करने की अधिसूचना शासन ने जारी कर दी!मगर इससे पहले कांग्रेस की सरकार का ही प्रदेश से बाइंड अप हो गया!अपने 15 महिनों के अल्प कार्यकाल में चालू करने के वजाय उल्टे बंद करने की कार्यवाही शुरु कर चुकी कांग्रेस अब क्योंकर घड़ियाली आंसूं बहा रही है! उधर 2013 2013,2018 के विधानसभा चुनाव और जौरा उप चुनाव में इसे चालू करने का स्वांग रचने वाले शिवराज भी अपने हवाई वादों को भूल अगामी 6 फरवरी को इसे बेचने के बोली लगाने का काम करेंगे! दोनों दलों के उच्च नेताओं द्वारा कैलारस शक्कर कारखाने को खोलने के वादे दर वादे केवल कसमे वादे बनकर रह गये! हां ये सच है कि कारखाने को चालू करवाने के लिये जमीं पर मार्कवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने काफी कुछ संघर्ष किया मगर उनकी ताकत काफी कुछ हद तक सीमित है!
0 टिप्पणियाँ