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भले ही 99 अपराधी छूट जाएं परंतु एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

कोर्ट ने हत्‍या करने वाले दोषियों की आजीवन कारावास की सजा रद्द की


इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 114 के तहत पारित दोषसिद्धि के 2012 के आदेश के खिलाफ हत्या के दो दोषियों द्वारा दायर एक आपराधिक अपील में अलीगढ़ के गांधी पार्क क्षेत्र में एक युवक की हत्या के मामले में एक महिला सहित दो हत्या के दोषियों की उम्रकैद की सजा रद्द करते हुए कहा कि 99 अपराधी भले छूट जाएं, लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। 
उक्‍त मामले में सूचना देने वाले के छोटे भाई नरेंद्र सैनी की कथित रूप से हत्या करने के आरोप में इंद्रभान सिंह सैनी ने 4 जनवरी 2006 को चार लोगों (दो अपीलकर्ताओं सहित) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि मृतक अपने घर के सामने खड़ा था जब पिंकू (अपीलार्थी संख्या 1), सोनू, मोनू मौके पर पहुंचे और पिंकू ने मारने के इरादे से मुखबिर के भाई पर लाइसेंसी राइफल से गोली चलाई। सोनू और मोनू ने पीड़िता का एक-एक हाथ पकड़ रखा था। इसके साथ ही आरोपी की मां- ईश्वरी देवी (अपीलकर्ता संख्या 2) अपने बेटों को फायरिंग के लिए उकसा रही थी। ट्रायल कोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के मूल्यांकन के बाद और रिकॉर्ड पर साक्ष्य का मूल्यांकन करने और मामले की योग्यता की जांच के बाद, दोषसिद्धि का फैसला सुनाया और उपरोक्त दो अपीलकर्ताओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 304 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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केस का शीर्षक - पिंकू @ जितेंद्र बनाम यूपी राज्य, ईश्वरी देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य

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