शिवपुरी तात्या टोपे इतने बलशाली थे कि उन्हें सामने से पकड़ना मुश्किल था। इसलिए पाड़ौन के जंगल में तात्या के साथ विश्वासघात हुआ। 8 अप्रैल 1859 को सोते समय ब्रिटिश फौज ने धोखे से गिरफ्तार किया। अंग्रेज हुकूमत से राजद्रोह और युद्ध लडने के आरोप में 15 अप्रैल,1859 को शिवपुरी में तात्या टोपे का कोर्ट मार्शल हुआ।
18 अप्रैल 1859 को शिवपुरी में फांसी हुई। कहा तो यह भी जाता है कि अंग्रेज सिपाहियों ने उनके बालों के गुच्छे काटकर स्मृति के रूप में सहेज कर रखे थे। यह बात तात्या टोपे स्मृति दिवस पर सोमवार आयोजित हुए मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए इतिहास के जानकार प्रोफेसर दिग्विजय सिंह सिकरवार ने कार्यक्रम को संबोधित कर कही। उन्होंने कहा कि तात्या टोपे के अविस्मरणीय बलिदान को देखकर अंग्रेज महिलाओं की आँखें भी सजल हो उठीं थीं।
कार्यक्रम का संचालन हेमलता चौधरी ने किया। इस अवसर पर भाजपा नेता अशोक ठाकुर, हेमंत ओझा, संजीव जैन, तरुण अग्रवाल सहित कई लोग मंचासीन रहे।
अपने लिए तो पशु-पक्षी भी जी लेते हैं जो देश के लिए जीते हैं वही हमारे देश के सच्चे महापुरुष है
अपने लिए तो पशु-पक्षी भी जी लेते हैं और वह भी अपने खाने पीने की व्यवस्था कर लेते हैं। परंतु मनुष्य को कुछ ऐसा करना चाहिए कि वह अपना जीवन देश के लिए जिए और जो मनुष्य देश और समाज के लिए अपना जीवन जीते हैं, हकीकत में वही महापुरुष होते हैं। तात्या टोपे की गोरिल्ला युद्ध नीति और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
महापुरुषों के चरण ही नहीं आचरण भी छुए- कलेक्टर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने कहा कि हम महापुरुषों के सिर्फ चरण ही ना छुए उनके आचरण को भी छूने का प्रयास करें, तो निश्चित रूप से हमारा जीवन सार्थक बनेगा। इसके साथ ही मैं केवल अपना ही ना सोचूँ, औरों के लिए मैं क्या कर सकता हूं यह सोचना शुरू कर दूं तो देखिए समाज में किस तरह से बदलाव आता है। तात्या का आदर्श आज भी प्रासंगिक है और इसका एक अंश भी हमने ले लिया तो हमारा जीवन सार्थक होगा।
हमें स्वतंत्रता मिली है लेकिन हम स्वच्छंद ना बने- एसपी
हमें स्वतंत्रता मिली है, इसका अर्थ यह नहीं कि हम स्वच्छंद हो जाएं। हमें स्वतंत्रता के सही मायने समझने होंगे। यदि हम स्वच्छंद बने तो फिर समाज में गलत संदेश जाएगा। हमें स्वतंत्रता दिलाने वाले हजारों लोग थे, जिन्होंने अपने प्राणों का भी उत्सर्ग इस देश पर किया। हम कुछ ऐसी नजीर प्रस्तुत करें ताकि लोग उससे कुछ सीख सकें। और जान भी सकें।
पुलिसकर्मी बोले- इनके बारे में सिर्फ सुना था, देखा आज
शहीद स्थल पर सीआरपीएफ सीआईएटी द्वारा हथियारों की प्रदर्शनी लगाई गई। जिसका प्रभारी सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट अविनेश निगम को बनाया गया।जिसमें अत्याधुनिक हथियार भी शामिल थे। इन्हें देखने के बाद पुलिसकर्मी बोले इनके बारे में अब तक सिर्फ सुना था, या फिल्मों में ही देखा था। आज पहली बार इन्हें रूबरू देख रहे हैं। इस दौरान तात्या और महारानी लक्ष्मी बाई पर केंद्रित प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। ऐतिहासक हथियार देखकर लोग आश्चर्य में थे।

0 टिप्पणियाँ