केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में अन्य राज्यों के लोगों को मतदान का अधिकार देने का फैसला किया गया है। इसके बाद लश्कर-ए-तैयबा समर्थित आतंकी ग्रुप कश्मीर फाइट ने गैर कश्मीरियों पर हमले तेज करने की धमकी दी है। उन्होंने आतंकी वेबसाइट पर यह धमकी दी है।
पोस्ट में कहा गया है कि जब जीतने का बड़ा कारण होता है, तो कैजुएलिटी भी होती हैं। हम में से कोई भी इससे खुश नहीं है, लेकिन यही सच्चाई है। सभी गैर कश्मीरियों को वोट देने के अधिकार के बाद यह सामने आ गया है कि दिल्ली में गंदा खेल खेला जा रहा है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि हम अपने हमलों को तेज करें और अपने लक्ष्यों को प्राथमिकता दें। इस पोस्ट में टारगेट्स की लिस्ट भी दी गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार ने कहा कि जो गैर कश्मीरी लोग राज्य में रह रहे हैं, वे वोटर लिस्ट में अपना शामिल कराकर वोट डाल सकते हैं। इसके लिए उन्हें निवास प्रमाण पत्र देने की जरूरत नहीं होगी।आयोग ने अपने निर्देश में आगे कहा है कि सुरक्षाबलों के जवान भी वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा सकते हैं। 2019 के चुनाव में जम्मू-कश्मीर में कुल 78.7 लाख वोटर्स था, लद्दाख के अलग होने से करीब 76.7 लाख वोटर्स है।
- जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 2014 में विधानसभा का चुनाव हुआ था, नवंबर 2018 में विधानसभा को भंग कर दिया गया था।
- जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से विधानसभा के चुनाव नहीं हुए हैं। इस साल के अंत तक प्रस्तावित है।
- पिछले चुनाव में 32,000 NPR मतदाता थे
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद, पीपल एक्ट 1950 और 1951 लागू होता है। यह जम्मू-कश्मीर में रहने वाले बाहर के व्यक्ति को केंद्र शासित प्रदेश की मतदाता सूची में पंजीकृत होने की अनुमति देता है। इसके लिए शर्त है कि उसका नाम उसके मूल निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से हटा दिया जाए।
उन्होंने बताया कि धारा 370 को निरस्त करने से पहले भी केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले बाहर के लोग मतदाता सूची में पंजीकृत होने के पात्र थे। उन्हें गैर स्थायी निवासी (NPR) मतदाताओं के रूप में कैरक्टराइज्ड किया गया था। पिछले संसदीय चुनावों के दौरान जम्मू-कश्मीर में लगभग 32,000 NPR मतदाता थे।
जम्मू-कश्मीर में चुनाव से जुड़ी 2 महत्वपूर्ण जानकारी
- जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 2014 में विधानसभा का चुनाव हुआ था, नवंबर 2018 में विधानसभा को भंग कर दिया गया था।
- जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से विधानसभा के चुनाव नहीं हुए हैं। इस साल के अंत तक प्रस्तावित है।
25 लाख नए वोटर्स जुड़ने की उम्मीद
आयोग ने कहा कि इस साल केंद्र शासित प्रदेश में 25 लाख नए वोटर जुड़ने की उम्मीद है। इसमें छात्र, मजदूर और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल होंगे। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद नाम जोड़ने की कवायद पहली बार की जा रही है। यह काम 25 नवंबर तक पूरा हो जाएगा।

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