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शिवपुरी : करैरा नगरपरिषद में हुए कुटीर घोटाले में अधिकारी व जनप्रतिनिधि मिले

 


नगर परिषद करैरा विकास के नाम पर हुए भ्रष्टाचार को लेकर वार्ड नंबर 3 की पार्षद शालिनी सोनी व वार्ड 15 की पार्षद खुशबू यादव ने सामूहिक रूप से मिलकर स्थानीय राम राजा गार्डन में आयोजित पत्रकार वार्ता में नगर परिषद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले कुटीर घोटाला उजागर हुआ था, लेकिन उस कुटीर घोटाला में ना कोई जांच कमेटी बनाई गई ना ही आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कराया गया। जबकि यह कुटीर घोटाला करोड़ों का है, इसमें बड़े बड़े अधिकारी, बाबू, जनप्रतिनिधि मिले हुए हैं। इस मामले में एक स्थाई कर्मचारी जितेंद्र गौड को मोहरा बनाकर बाकी बड़े लोगों को कुटीर घोटाले से बचाया जा रहा है।

जबकि पूरी योजना का क्रियान्वयन ही संदेहास्पद है। पात्रों को अपात्र व अपात्रों को पात्र बनाया जा रहा है। कई महीनों से पेमेंट हो रहा है। इसकी भनक सीएमओ व अध्यक्ष को न लगना इनकी अकर्मण्यता सिद्ध हो रही है। इसके बाद ना रही खार पर 20 एचपी की मोटर चोरी हो गई इसकी कोई एफआईआर तक नहीं कराई गई। क्योंकि मोटर चोरी होने में कहीं स्थानीय अमले की संलिप्तता तो नहीं है।

सबसे हास्यास्पद बात यह है कि इसका पता जब चला जब फिल्टर पर गेट डल रहा था, मैं वहा गई तब पता चला कि फिल्टर प्लांट की चारों मोटर खराब हो गई, तब मैंने ना रही खार से सप्लाई चालू करवाने के लिए दबाव डाला तो दवे मुंह कर्मचारी बोले कि वहां की मोटर तो है ही नहीं, इसके अतिरिक्त नगर की देखभाल के लिए करीब 28 लाख रुपए की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जो सारे बंद पड़े हुए हैं। इसकी फाइलें भी गुम कर दी गई है, की कोई इसकी जानकारी ना मांग सकें।

जबकि डेनिडा रोड चौराहे पर तीन कैमरे कागजों में लगाए गए हैं। लेकिन मौके पर एक ही कैमरा लगा हुआ है। इसकी भी कोई एफआईआर तक नहीं कराई गई है। जिससे भ्रष्ट अफसर व जनप्रतिनिधि न सिर्फ खुलेआम घूम रहे है बल्कि, जनता का पैसा भी बर्बाद कर रहे है।

सत्यापन कराया जाए तो होंगे करोड़ों के घोटाले उजागर
इसके मेंटेनेंस के लिए भी हर दो-तीन माह में अच्छा खासा फंड निकाला जाता है। लेकिन आज तक सारे कैमरे बंद पड़े हैं। इसके अलावा मनमानी तरीके से टेंडरों को भी निरस्त किया जा रहा है। नाला निर्माण के लिए टेंडर आया था, इसमें 4 निविदा आई थी इसको भी गलत तरीके से निरस्त किया गया। इसमें रिलाइविंगवाल की शर्त लगाकर निरस्त किया गया है। जबकि शुभम कंस्ट्रक्शन कंपनी इसको पूरा करती थी, मनमाने तरीके से इस को निरस्त किया गया है। इसमें ना तो परिषद को विश्वास में लिया गया ना ही परिषद को सूचना दी गई।इस तरह टेंडर को निरस्त करना भी इनकी भ्रष्ट छवि को प्रदर्शित करता है। इस तरह नगर परिषद करैरा बिल्कुल बेलगाम, निरंकुश हो चुकी है। यहां स्टोर का यदि भौतिक सत्यापन कराया जाए तो करोड़ों के घोटाले उजागर होंगे।

कमेटी बनाकर हो जांच
पत्रकार वार्ता के माध्यम से शासन से मांग करती हूं कि इस नगर परिषद की उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर जांच कराई जाए। इससे जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे का सदुपयोग जनहित में हो सकें। उन्होंने भ्रष्टाचार के सबूत भी पेश किए व अधिनियम की जानकारी भी पत्रकारों को बताई।स्थानीय पत्रकारों ने भी अनेक प्रश्न पूछे जिनका पार्षदों ने बखूबी उत्तर दिए। बताना होगा कि नगर परिषद के भ्रष्टाचार को लेकर आज तक किसी पार्षद या नेताओं ने कोई पत्रकारवार्ता नहीं बुलाई।

एफआईआर के लिए दिया हैं आवेदन
"महिला पार्षदों द्वारा लगाए गए आरोप गलत है, कुटीर घोटाले में हमने एफआईआर के लिए आवेदन दिया है। साथ ही जांच कमेटी भी बनाई गई है, रही बात कागजों में कैमरे लगाने की तो वह मेरे समय का मामला नहीं।"
-ताराचंद धूलिया, सीएमओ, नप करैरा

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