शिविर के पूर्व प्रधान जिला न्यायाधीश राजेन्द्र प्रसाद सोनी ने वृद्धाश्रम एवं बाल गृह का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आवासरत जन को मिलने वाले स्वल्पाहार, भोजन एवं स्वास्थ्य व मनोरंजन संबंधी सुविधाओं के बारे में देखा गया तत्पश्चात श्री सोनी ने कहा कि बालकों में ईश्वर का वास होता है जबकि माता-पिता साक्षात ईश्वर का रूप होते हैं हमें प्रयास करना चाहिए कि कोई बालक माता-पिता अथवा परिवार के बगैर जीवन यापन करने का मजबूर न हो और न ऐसी परिस्थिति निर्मित हो जिससे कि वरिष्ठ नागरिकों को वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़े।
साथ ही कहा कि वृद्धाश्रम में रहने वाले नगरिकों के यदि किसी संवैधानिक या कानूनी अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वे विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही कहा कि ऐसी सामाजिक संस्थाओं में प्रत्येक व्यक्ति को मिलजुलकर सहायोग करना चाहिए। तत्पश्चात वृद्धाश्रम में रहने वाले वरिष्ठ नागरिक एवं बाल गृह में रहने बालकों ने अपने अनुभव प्रधान जिला न्यायाधीश के समक्ष साझा किये। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय शिवपुरी से उपस्थित मेडिकल टीम के द्वारा वृद्धाश्रम में निवासरत वृद्धजनों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा उन्हें निशुल्क दवाइयां दी गई।
इस अवसर पर जिला न्यायाधीश/सचिव अर्चना सिंह, जिला रजिस्ट्रार जितेन्द्र मेहर, जिला विधिक सहायता अधिकारी डॉ.वीरेन्द्र कुमार चढ़ार, वृद्धश्रम मंगलम के डायरेक्टर अरविंद चौधरी, मैनेजर विवेक काले, स्वास्थ्य टीम से डॉ.प्रवीण वर्मा, डॉ.वैष्णौदेवी चंदौरिया, डॉ.एस.के.पिप्पल, होम्योपैथी से डॉ धर्मेन्द्र दीक्षित बाल गृह से अधीक्षक मनीषा कृष्णानी, बाल कल्याण अधिकारी हिम्मत सिंह रावत, हाउस फादर समीर खान आदि उपस्थित रहे।
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